बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप: त्रिशा-गायत्री का ब्रॉन्ज के साथ सफर समाप्त, सेमीफाइनल में हार पर बोलीं- 'आज का दिन हमारा नहीं था'
नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में शनिवार को विमेंस डबल्स सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी त्रिशा जॉली/गायत्री गोपीचंद चीन की मौजूदा चैंपियन लियू शेंग शू/टैन निंग के हाथों 21-18, 13-21, 8-21 से हार गई, जिसके साथ उन्हें ब्रॉन्ज मेडल के साथ संतोष करना पड़ा।
त्रिशा-गायत्री जब विमेंस डबल्स के सेमीफाइनल में उतरीं, तो उनका लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप के विमेंस डबल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनना था, लेकिन चीनी जोड़ी उनके लिए बहुत मजबूत साबित हुईं और ऐतिहासिक फाइनल में पहुंचने का उनका सपना टूट गया।
अपने शानदार सफर के निराशाजनक अंत के बावजूद, त्रिशा और गायत्री ने ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीता—यह 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद 15 वर्षों में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का पहला विमेंस डबल्स मेडल है।
सेमीफाइनल गंवाने के बाद त्रिशा ने कहा, "आज का दिन हमारा नहीं था। पहले गेम में हम जीते, और दूसरे गेम के पहले हाफ में भी हम कंट्रोल में थे। उसके बाद, उन्हें (चीनी जोड़ी) किसी तरह लय मिल गई और हमने अपनी लय खो दी। वे बढ़त बना रहे थे, प्वाइंट्स के मामले में भी हमसे आगे निकल गए थे, और हम उन प्वाइंट्स की भरपाई नहीं कर पाए। वे थोड़े धैर्यवान भी थे, जिससे उन्हें मदद मिली।"
गायत्री गोपीचंद का मानना है कि उन्होंने अपनी जोड़ीदार के साथ काफी जल्दबाजी की, जबकि चीनी जोड़ी ने काफी धैर्य दिखाया। उन्होंने कहा, "वे काफी शांत थे। हम बस... हम जल्दबाजी कर रहे थे। हम बस प्वाइंट्स चाहते थे। आज हममें धैर्य की कमी थी। बस और ज्यादा धैर्य रखने की जरूरत थी, क्योंकि वे वर्ल्ड नंबर 1 हैं, वे आसानी से प्वाइंट्स नहीं देने वाले थे, लेकिन हां, इसके अलावा, यह एक बहुत ही शानदार मुकाबला था। हम जिस तरह से खेले, उससे खुश हैं, बस... आज का दिन हमारा नहीं था।"
विमेंस डबल्स जोड़ी से पहले पीवी सिंधु, आयुष भी धैर्य खोने के बारे में बात में बात कर चुके हैं। त्रिशा का मानना है कि जब खिलाड़ी इस स्तर पर खेलते हैं, तो प्रत्येक अंक पर नियंत्रण और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब आप इतने ऊंचे स्तर पर खेलते हैं, तो हर प्वाइंट पर नियंत्रण और सतर्क रहने की जरूरत होती है। अगर आप बस आंखें बंद करके खोलें, तो ऐसा लगता है कि जैसे पांच प्वाइंट्स निकल गए हों। इसीलिए वर्ल्ड नंबर 1 खिलाड़ी दूसरों से अलग होते हैं। वे बहुत सटीक खेल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि प्रत्येक प्वाइंट पर वे अपनी लय में थे और नेट पर आक्रामक खेल रहे थे। मुझे लगता है कि आज का दिन हमारे पक्ष में नहीं था। अगर हम दूसरे गेम के दूसरे हाफ में अपनी लय पा लेते, तो शायद हम मैच का रुख अपनी तरफ मोड़ सकते थे।"
भारत ने पहला गेम 21-18 से अपने नाम किया, जिसके बाद अगले गेम (13-21) में त्रिशा-गायत्री ने चीनी खिलाड़ियों को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन तीसरा और निर्णायक गेम एकतरफा (8-21) नजर आया।
गायत्री गोपीचंद ने कहा, "चीनी जोड़ी आक्रामक और धैर्यवान भी। हम बस प्वाइंट हासिल करना चाहते थे। एक समय पर हम बहुत ज्यादा डिफेंसिव भी हो गए थे।"
गायत्री ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में अपने सफर को शानदार बताते हुए कहा, "यह हफ्ता बहुत शानदार रहा। हमने कुछ बेहतरीन जोड़ियों के खिलाफ खेला। हर चीज से बहुत कुछ सीखने को मिला। इस हार से भी बहुत कुछ सीखने को मिला है। हम बस आगे की ओर देख रहे हैं।"
हाल ही में त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद को 'अर्जुन अवॉर्ड' के लिए चुना गया, जिसके कुछ दिनों बाद इस जोड़ी ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप का ब्रॉन्ज भी अपने नाम किया। त्रिशा जॉली ने कहा, "इस हफ्ते हमें मेडल और अर्जुन अवॉर्ड, दोनों मिले हैं। जाहिर है, 'अर्जुन अवॉर्ड' से हमें पूरे टूर्नामेंट के दौरान हौसला मिला है। एशियन गेम्स आने वाले हैं, लेकिन हमें बस इस मेडल का आनंद लेना चाहिए। अटैक करते समय मुझे थोड़ा और सब्र रखने की जरूरत है, और इन खिलाड़ियों के खिलाफ मुझे और वेरिएशन इस्तेमाल करने होंगे। अगली बार के लिए यह काम आएगा। मैं अपने स्ट्रोक्स में और वेरिएशन लाने की पूरी कोशिश करूंगी और उस पर काम करूंगी।"
--आईएएनएस
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