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Anshul Kamboj: 125 से 140 kmph तक पहुंची रफ्तार, न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार गेंदबाजी से बदली किस्मत

 

भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाने के लिए युवा तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने कड़ी मेहनत की है। मैनचेस्टर टेस्ट में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी की कमियों पर काम किया और न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड वनडे में इसका शानदार नतीजा दिखाया। 25 साल के इस गेंदबाज ने 10 ओवर में सिर्फ 22 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने 2 मेडन ओवर भी डाले।

अंशुल की गेंदबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनकी सटीक लाइन और लेंथ रही। उन्होंने न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया। खास बात यह रही कि दूसरे स्पेल में उनकी रफ्तार करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।

मैनचेस्टर टेस्ट में 125 kmph की रफ्तार से हुई थी शुरुआत

अंशुल कंबोज के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही। जुलाई 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में चोटिल अर्शदीप सिंह की जगह उन्हें टीम में शामिल किया गया था।

भारतीय टीम को उनसे 135 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी की उम्मीद थी, लेकिन उनकी गेंदों की गति करीब 125 किलोमीटर प्रति घंटे रही। उनके प्रदर्शन से बचपन के कोच सतीश राणा भी हैरान थे।

वीडियो देखने के बाद कोच को पता चला कि अंशुल का रन-अप सही लय में नहीं था। समस्या सिर्फ गेंद की गति या लाइन-लेंथ की नहीं, बल्कि गेंदबाजी की बुनियादी तकनीक से भी जुड़ी थी।

कोच ने बदला रन-अप, घंटों कराया लेंथ पर अभ्यास

मैनचेस्टर टेस्ट के बाद अंशुल और उनके कोच ने तकनीक सुधारने पर ध्यान दिया। कोच ने उनका रन-अप करीब दो गज छोटा किया। इसके बाद फिटनेस और गेंदबाजी की लय पर काम किया गया।

अंशुल ने लगातार एक ही लेंथ पर घंटों अभ्यास किया। उनका लक्ष्य गेंदबाजी में निरंतरता लाना और अपनी स्वाभाविक गति हासिल करना था। ऑकलैंड में उनकी गेंदबाजी में इसका असर साफ दिखाई दिया।

रणजी ट्रॉफी में 10 विकेट लेकर बनाया था रिकॉर्ड

हरियाणा के करनाल में 6 दिसंबर 2000 को जन्मे अंशुल दाएं हाथ के तेज-मध्यम गति के गेंदबाज हैं। उन्होंने फरवरी 2022 में हरियाणा की ओर से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया था।

2023-24 विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने 10 मुकाबलों में 17 विकेट लिए। इस सीजन हरियाणा ने पहली बार टूर्नामेंट का खिताब जीता था।

नवंबर 2024 में अंशुल ने केरल के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले में एक पारी के सभी 10 विकेट लेकर इतिहास रचा। उन्होंने 49 रन देकर 10 विकेट हासिल किए। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में एक पारी में 10 विकेट लेने वाले वह तीसरे गेंदबाज बने।

IPL 2024 में मुंबई इंडियंस ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया था। बाद में वह चेन्नई सुपर किंग्स से भी जुड़े।

वेस्टइंडीज के खिलाफ खराब प्रदर्शन के बाद गिल ने जताया भरोसा

मैनचेस्टर टेस्ट के बाद अंशुल को अक्टूबर 2026 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला। हालांकि, शुरुआती मुकाबलों में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

इसके बावजूद कप्तान शुभमन गिल ने उनका समर्थन किया। गिल ने कहा था कि किसी भी खिलाड़ी के लिए टीम में आते ही तुरंत अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। अंशुल और आकीब नबी जैसे गेंदबाजों को टीम आगे भी मौके देना चाहती है।

गिल ने अंशुल की बल्लेबाजी क्षमता का भी जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि अंशुल आठवें नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं, जो टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

न्यूजीलैंड दौरे पर तैयारी का मिला पूरा समय

ऑकलैंड वनडे से पहले अंशुल को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिला। वह न्यूजीलैंड दौरे पर इंडिया-A की ओर से टेस्ट खेलने के बाद सीनियर टीम से जुड़े थे। 31 अक्टूबर को लिंकन से ऑकलैंड पहुंचने के बाद उन्हें अभ्यास का मौका मिला।

इस बार उन्हें किसी चोटिल खिलाड़ी के विकल्प के रूप में अचानक मैदान पर नहीं उतरना पड़ा। इसका फायदा उनकी गेंदबाजी में दिखाई दिया।

सैंटनर और नाथन स्मिथ को लगातार ओवरों में किया आउट

न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में शुभमन गिल ने अंशुल को आठवें ओवर में गेंद सौंपी। पहले स्पेल के 5 ओवर में उन्होंने सिर्फ 12 रन दिए और एक मेडन ओवर भी डाला।

दूसरे स्पेल में उनकी गेंदबाजी और प्रभावी हो गई। उन्होंने न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर को बोल्ड किया। अगले ओवर में नाथन स्मिथ को आउट किया। स्मिथ का कैच विराट कोहली ने स्लिप में शानदार डाइव लगाकर पकड़ा।

इस तरह अंशुल ने 10 ओवर में 22 रन देकर 2 विकेट हासिल किए और अपनी गेंदबाजी से मैच में अहम योगदान दिया।

वॉबल सीम गेंद बनी अंशुल का बड़ा हथियार

मैच के बाद अंशुल ने अपनी गेंदबाजी की रणनीति बताते हुए कहा कि उनका ध्यान लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंद डालने पर था। उन्होंने बताया कि उस दिन वॉबल सीम गेंद अच्छी काम कर रही थी और पिच से भी अच्छा बाउंस मिल रहा था।

वॉबल सीम ऐसी गेंद होती है, जिसमें गेंद की सीम हवा में या पिच से टकराने के बाद डगमगा सकती है। इससे बल्लेबाज के लिए गेंद की दिशा का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

अंशुल को इस गेंद का अच्छा फायदा मिला और न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

अंशुल बोले- एक मैच से करियर तय नहीं होता

शानदार प्रदर्शन के बाद प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए अंशुल ने कहा कि किसी एक मुकाबले से खिलाड़ी का पूरा करियर तय नहीं होता। उन्होंने बताया कि वह पहले भी इसी तरह गेंदबाजी करते रहे हैं और मैनचेस्टर टेस्ट के बाद बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली।

अंशुल का ऑकलैंड प्रदर्शन बताता है कि तकनीक में सुधार, लगातार अभ्यास और टीम के भरोसे से खिलाड़ी अपने खेल में बदलाव ला सकता है।