पाकिस्तान क्रिकेट के 5 खिलाड़ी जिनका करियर फिक्सिंग कांड से हुआ प्रभावित, एक पर लगा था आजीवन प्रतिबंध
पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास कई शानदार खिलाड़ियों और यादगार प्रदर्शनों से भरा रहा है, लेकिन समय-समय पर मैच और स्पॉट फिक्सिंग के विवादों ने इस खेल की छवि को भी प्रभावित किया है। कई पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर भ्रष्टाचार और फिक्सिंग से जुड़े गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद जांच हुई और कुछ मामलों में खिलाड़ियों को लंबे समय तक प्रतिबंध का सामना करना पड़ा।
सलीम मलिक से लेकर मोहम्मद आमिर तक, ऐसे कई नाम हैं जिनके क्रिकेट करियर पर फिक्सिंग प्रकरण का गहरा असर पड़ा। आइए जानते हैं पाकिस्तान के उन 5 खिलाड़ियों के बारे में, जो इन विवादों के कारण सुर्खियों में रहे।
सलीम मलिक पर लगा था आजीवन प्रतिबंध
सलीम मलिक 1980 और 1990 के दशक में पाकिस्तान के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल थे। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर शानदार रहा, लेकिन मैच फिक्सिंग के आरोपों ने उनके करियर पर बड़ा दाग लगा दिया।
साल 2000 में जस्टिस कय्यूम की जांच के बाद मलिक पर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया। उन पर मैचों के नतीजे प्रभावित करने की कोशिश के आरोप लगे थे। बाद में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों शेन वॉर्न और मार्क वॉ ने भी दावा किया कि मलिक ने 1994-95 के दौरान एक टेस्ट मैच में पाकिस्तान की हार के लिए उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की थी।
मलिक ने प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी। हालांकि शुरुआत में उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में 2008 में लाहौर की अदालत ने उनके प्रतिबंध को हटा दिया।
दानिश कनेरिया का करियर भी विवादों में घिरा
दानिश कनेरिया पाकिस्तान के प्रमुख लेग स्पिन गेंदबाजों में से एक रहे। उपमहाद्वीप की स्पिन मददगार पिचों पर उनकी गेंदबाजी काफी प्रभावी मानी जाती थी।
2012 में फिक्सिंग से जुड़ी गतिविधियों को लेकर कनेरिया पर जांच हुई। शुरुआत में मामले में उन्हें राहत मिली, लेकिन बाद में इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में दोषी पाया और आजीवन प्रतिबंध लगा दिया।
कनेरिया ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 2013 में उनकी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद उनका क्रिकेट करियर लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया।
सलमान बट पर स्पॉट फिक्सिंग का आरोप
पाकिस्तान की कप्तानी कर चुके सलमान बट का नाम 2010 के इंग्लैंड दौरे के दौरान सामने आए स्पॉट फिक्सिंग मामले में आया। इस मामले में बट पर जानबूझकर नो-बॉल करवाने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा।
मामले में एजेंट मजहर मजीद का नाम भी सामने आया था। जांच के बाद सलमान बट को दोषी पाया गया और उन्हें क्रिकेट से प्रतिबंधित कर दिया गया।
यह विवाद पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बड़े झटकों में से एक माना गया, क्योंकि इसमें टीम के कप्तान सहित कई खिलाड़ी शामिल थे।
मोहम्मद आसिफ पर लगा पांच साल का बैन
मोहम्मद आसिफ पाकिस्तान के प्रतिभाशाली तेज गेंदबाजों में गिने जाते थे। उनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक सफल लंबा करियर बनाने की क्षमता थी, लेकिन स्पॉट फिक्सिंग मामले ने उनके क्रिकेट करियर को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
2010 के मामले में आसिफ को सलमान बट और मोहम्मद आमिर के साथ दोषी पाया गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने उन पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया।
मामले की कानूनी कार्रवाई भी हुई और यूनाइटेड किंगडम में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी। प्रतिबंध और कानूनी विवादों के बाद आसिफ फिर उस स्तर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी नहीं कर सके।
मोहम्मद आमिर सबसे कम उम्र के आरोपी खिलाड़ियों में शामिल
2010 के स्पॉट फिक्सिंग मामले में मोहम्मद आमिर सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में थे। उस समय वह पाकिस्तान के उभरते हुए तेज गेंदबाज थे और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तेजी से अपनी पहचान बना रहे थे।
आरोपों के मुताबिक आमिर ने अपने कप्तान सलमान बट के कहने पर जानबूझकर नो-बॉल फेंकी थी। इस घटना ने आईसीसी की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई का ध्यान आकर्षित किया और इसके बाद पूरे मामले की जांच आगे बढ़ी।
आमिर को प्रतिबंध और जेल की सजा दोनों का सामना करना पड़ा। हालांकि अन्य आरोपियों की तुलना में उनके मामले में बाद में अलग रुख देखने को मिला। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने 2016 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की अनुमति दी।
पाकिस्तान क्रिकेट पर पड़ा गहरा असर
इन मामलों ने न केवल संबंधित खिलाड़ियों के करियर को प्रभावित किया, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट की छवि पर भी सवाल खड़े किए। फिक्सिंग विवादों के बाद क्रिकेट में भ्रष्टाचार रोकने के लिए निगरानी और नियमों को और गंभीरता से लागू किया गया।
इन पांचों मामलों में परिस्थितियां और कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग रही, लेकिन एक बात समान रही—फिक्सिंग से जुड़े विवादों ने खिलाड़ियों के करियर और प्रतिष्ठा पर लंबे समय तक असर डाला।