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राजस्थान के इस मंदिर को क्यों कहा जाता है गणेश 'इश्किया मंदिर' ? 2 मिनट के वीडियो में जाने नाम के पीछे की रहस्यमयी गाथा 

 

राजस्थान के जोधपुर शहर में एक ऐसा मंदिर है जहां प्यार का मेला लगता है। यहां हर प्रेमी की मुराद पूरी होती है। आम गणेश मंदिरों की तरह इश्किया गणेश मंदिर में भी रोजाना पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। लेकिन यह मंदिर अन्य मंदिरों से ज्यादा खास और लोकप्रिय है। दरअसल, यहां आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु प्रेमी होते हैं। कहा जाता है कि भगवान गणपति यहां आने वाले हर प्रेमी की मुराद पूरी करते हैं। यहां आने वाला कोई भी प्रेमी भक्त निराश नहीं होता। यही वजह है कि यह मंदिर प्रेमियों के लिए खास है और इसे इश्किया गणेश मंदिर कहा जाता है।

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जल्दी होता है कुंवारे प्रेमियों का रिश्ता

मान्यता है कि इश्किया गणेश मंदिर में माथा टेकने और पूजा करने से कुंवारे प्रेमियों का जल्द ही विवाह हो जाता है। उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिल जाता है। दांपत्य जीवन में प्रेम संबंध मधुर बने रहते हैं। प्रेमी जोड़ों के अलावा हर आयु वर्ग के अन्य श्रद्धालु भी यहां अपनी मुराद लेकर आते हैं और गणपति के दरबार में अर्जी लगाते हैं।

गुरु गणपति बने इश्किया गणेश

स्थानीय लोगों का कहना है कि जोधपुर में इश्किया गणेश मंदिर की स्थापना करीब सौ साल पहले हुई थी। शहर की एक संकरी गली में एक घर के बाहर गुरु गणपति नाम से यह मंदिर स्थापित किया गया था। इसकी बनावट ऐसी है कि यहां खड़ा व्यक्ति दूर से किसी को आसानी से दिखाई नहीं देता। यही वजह थी कि प्रेमी जोड़े अपनी पहली मुलाकात के लिए यहां छिपकर आते थे। धीरे-धीरे यह मंदिर प्रेमियों की पहली पसंद बन गया और लड़के-लड़कियां यहां मिलने के लिए आने लगे। यहां आकर वे गजानन के दर्शन कर विवाह की कामना करते। विवाह के बाद प्रेमी जोड़े इसे भगवान का आशीर्वाद मानकर आभार प्रकट करने आते हैं। इस तरह यह मंदिर गुरु गणपति से इश्किया गणेश मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

बुधवार को लगता है प्रेमियों का मेला

इस मंदिर में हर बुधवार को प्रेमियों का मेला लगता है। यहां कई भक्त विवाह की अर्जी लगाने आते हैं। कई भक्त विवाह का निमंत्रण देने आते हैं और कई भक्त आभार प्रकट करने आते हैं। यह मंदिर सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 5.30 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। बुधवार को रात 11 बजे तक दर्शन किए जा सकते हैं। गणेश चतुर्थी पर पूरे दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।