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राजस्थान के इस 400 साल पुराने मंदिर में हर दिन सजती हैं नई गाड़ियों की कतारें, वीडियो में जानिए इस परंपरा का रहस्य 

 

राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे 'गुलाबी नगर' के नाम से जाना जाता है, न सिर्फ अपनी भव्य हवेलियों और किलों के लिए मशहूर है, बल्कि यहाँ आस्था का एक अनोखा केंद्र भी है — मोती डूंगरी गणेश मंदिर। इस मंदिर की खासियत यह है कि जब भी कोई नया वाहन खरीदा जाता है, चाहे वह दोपहिया हो या चारपहिया, वाहन मालिक सबसे पहले इसे भगवान गणेश के चरणों में ले जाकर पूजा कराते हैं। हर रोज़, खासकर शुभ मुहूर्त वाले दिनों पर, मोती डूंगरी मंदिर के बाहर नई गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। आखिर क्या कारण है कि लोग अपने नए वाहन के साथ सबसे पहले यहाँ आते हैं? इस परंपरा के पीछे आस्था, परंपरा और एक अद्भुत विश्वास की कहानी छिपी है।

<a href=https://youtube.com/embed/w-rFaeiFsEU?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/w-rFaeiFsEU/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Moti Dungri Ganesh Temple Jaipur | मोती डूंगरी मंदिर का इतिहास, कथा, मान्यता, चमत्कार और लाइव दर्शन" width="695">

मोती डूंगरी मंदिर: आस्था का गौरव
जयपुर के बीचों-बीच एक छोटी पहाड़ी पर बसा मोती डूंगरी मंदिर, 18वीं सदी में बनाया गया था। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश की एक दुर्लभ मूर्ति स्थापित है, जिसे लगभग 500 साल पुराना माना जाता है। कहते हैं कि यह प्रतिमा गुजरात से लाई गई थी और यहाँ विशेष अनुष्ठान के साथ स्थापित की गई थी।भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' — अर्थात् सभी बाधाओं को दूर करने वाला — माना जाता है। इसलिए नए वाहन की शुरुआत से पहले लोग गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेना बेहद जरूरी समझते हैं ताकि उनके जीवन और यात्राओं में कोई विघ्न न आए।

नए वाहन की पूजा का महत्व
भारतीय संस्कृति में किसी भी नए कार्य, वस्तु या परियोजना की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से होती है। नया वाहन खरीदना भी एक बड़ा निर्णय और खुशी का अवसर होता है। लोग मानते हैं कि मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा करवाने से उनका वाहन सुरक्षित रहेगा, दुर्घटनाओं से बचाव होगा और यात्रा मंगलमयी होगी।वाहन पूजा के दौरान नारियल फोड़ा जाता है, वाहन के आगे हल्दी-कुमकुम से तिलक किया जाता है और अगरबत्तियाँ जलाई जाती हैं। कुछ लोग वाहन के दरवाजों, टायरों और बोनट पर भी फूल चढ़ाते हैं। पुजारी विशेष मंत्रोच्चारण कर वाहन के मालिक और उसके परिवार के लिए मंगलकामना करते हैं।

हर शुभ दिन पर भीड़ का उमड़ना
विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, अक्षय तृतीया, नवरात्रि, धनतेरस जैसे त्योहारों पर मोती डूंगरी मंदिर के बाहर वाहनों की भीड़ देखते ही बनती है। इसके अलावा रविवार, बुधवार और गुरुवार को भी काफी भीड़ रहती है, क्योंकि ये दिन गणेश जी को समर्पित माने जाते हैं।वाहन डीलरशिप से सीधे वाहन को मोती डूंगरी ले जाना, वाहन मालिकों के लिए एक अनिवार्य परंपरा बन चुकी है। नई कारें, बाइक्स, स्कूटर, ट्रक और यहां तक कि बड़े व्यावसायिक वाहन भी यहाँ आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। कई बार इतनी भीड़ हो जाती है कि ट्रैफिक पुलिस को विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है।

क्यों चुनते हैं लोग मोती डूंगरी को?
आस्था का केंद्र: मोती डूंगरी गणेश जी को 'सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी करने वाला' माना जाता है। जयपुर के निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से लोग यहाँ आते हैं।
संपन्नता और सुरक्षा की कामना: नया वाहन जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक होता है। इसलिए वाहन मालिक चाहते हैं कि उनकी यह नई यात्रा मंगलमय रहे।
सदियों पुरानी परंपरा: जयपुर के राजपरिवार से लेकर आम नागरिक तक, सभी ने वर्षों से मोती डूंगरी में नए कार्यों की शुरुआत करवाई है। यह परंपरा समय के साथ और मजबूत हुई है।
स्थानीय मान्यता: माना जाता है कि यहाँ पूजा करवाने से वाहन लंबी उम्र तक चलता है और अचानक होने वाली दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।

मंदिर परिसर में क्या सुविधाएँ हैं?
मोती डूंगरी मंदिर परिसर में वाहन पूजा के लिए विशेष पुजारियों की व्यवस्था रहती है। वहां पूजा सामग्री (फूल, नारियल, अगरबत्ती) के लिए छोटे स्टॉल भी लगे होते हैं। कई बार वाहन मालिकों के लिए शीघ्र पूजा का विकल्प भी दिया जाता है ताकि भीड़ में ज्यादा इंतजार न करना पड़े।मंदिर प्रबंधन समय-समय पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आयोजनों और व्यवस्थाओं का संचालन करता है। हाल ही में मंदिर परिसर के आसपास साफ-सफाई और ट्रैफिक कंट्रोल को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया गया है।

मोती डूंगरी: आस्था से पर्यटन तक
आज मोती डूंगरी मंदिर न सिर्फ जयपुर का एक धार्मिक केंद्र है बल्कि यह पर्यटन का भी बड़ा हिस्सा बन गया है। यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटक भी स्थानीय आस्था के इस अद्भुत दृश्य से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते। जब वे सजी-धजी नई गाड़ियों के बीच भक्तों को श्रद्धा से पूजा करते देखते हैं, तो भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित होते हैं।इसके आसपास स्थित मोती डूंगरी किला और बिरला मंदिर भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं, जिससे पूरा क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण बन गया है।