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सैंकड़ों सालों से भक्तो का कल्याण करते आ रहे राजस्थान के ये 5 शिव मंदिर, वीडियो में चमत्कार देख निकल पड़ेंगे दर्शन करने 

 

पौराणिक तथ्यों के अनुसार भगवान शिव का जन्म किसी जीव से नहीं हुआ बल्कि वे स्वयंभू हैं। वे भगवान विष्णु के तेज से प्रकट हुए और अनादि काल से विद्यमान हैं। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। ऐसे में इस दिन यानी महाशिवरात्रि को भगवान शिव के पर्व के रूप में मनाया जाता है। जयपुर को देवताओं की नगरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां मंदिरों की संख्या बहुत अधिक है। जब सवाई जयसिंह ने जयपुर की स्थापना की। तब उन्होंने शहर के हर चौराहे, तिराहे, गलियों के मुहाने और मुख्य मार्गों पर मंदिरों की स्थापना की। शिवरात्रि पर आइए जानते हैं जयपुर के उन पांच शिव मंदिरों के बारे में जहां भक्तों का ज्यादा जुड़ाव रहता है।

<a href=https://youtube.com/embed/LGzqgQk5ie0?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/LGzqgQk5ie0/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="पवित्र शिवरात्रि व्रत कथा | सुपरफास्ट शिवरात्रि व्रत कथा | Shivratri Vrat Katha" width="695">
झारखंड महादेव मंदिर
प्रेमपुरा गांव जयपुर के पास वैशाली नगर इलाके में हुआ करता था, जो अब शहरी सीमा में है। सदियों पहले यहां खूब झाड़ियां हुआ करती थीं। झाड़ियों के अलग-अलग समूहों के कारण यहां के मंदिर का नाम झारखंड महादेव मंदिर पड़ा। यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है और दक्षिण भारत की शैली में बना हुआ है। जयपुर के सबसे प्रमुख मंदिरों में इसकी गिनती होती है। मंदिर में भगवान शिव की पूजा तो हर रोज होती है लेकिन महाशिवरात्रि के मौके पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। हर बार की तरह इस बार भी सुबह चार बजे से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग जाती है। करीब दो किलोमीटर लंबी श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई है। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतार में दर्शन की व्यवस्था की गई है।

तारकेश्वर महादेव मंदिर
तारकेश्वर महादेव मंदिर जयपुर शहर के चौड़ा रास्ता में स्थित है, जहां का महत्व अपने आप में अलग है। यह मंदिर जयपुर की स्थापना से पहले का है। मान्यता है कि यहां मंदिर में शिव लिंग की स्थापना नहीं की गई थी बल्कि शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। पहले इस मंदिर को ताड़कनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता था और बाद में ताड़केश्वर मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। 1727 में जब जयपुर की स्थापना हुई तो वास्तुकार विद्याधर जी ने इस मंदिर की रूपरेखा तैयार की और इसे एक बड़े मंदिर के रूप में बनाया गया। हर बार की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि के दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन के लिए आ रहे हैं।

केदारनाथ शिव मंदिर
केदारनाथ शिव मंदिर जयपुर के पास खोह नागोरियन इलाके में एक पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। इस मंदिर की स्थापना चंदा मीना नामक शासक ने 1102 ई. में की थी। इस मंदिर की मूर्ति उत्तराखंड के केदारनाथ से लाई गई थी। इसी वजह से इस मंदिर का नाम केदारनाथ शिव मंदिर पड़ा। यहां शिव लिंग के साथ-साथ माता पार्वती और नंदी की मूर्तियां भी स्थापित हैं। यहां चारों तरफ पहाड़ियों का नजारा है और यह मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर है। ऐसे में इस शिव मंदिर की भव्यता अपने आप में अनूठी है। सावन के महीने में यहां भक्तों की लंबी कतार लगती है। चूंकि यह मंदिर काफी ऊंचाई पर है। ऐसे में यहां आने वाले भक्तों की संख्या सीमित है। दर्शन आराम से हो रहे हैं।

चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर
यह मंदिर जयपुर शहर के बनीपार्क में स्थित है। मंदिर की स्थापना करीब 60 साल पहले हुई थी। कहा जाता है कि 60 साल पहले यहां एक गाय के थन से अचानक दूध की धारा बहने लगी थी। लोगों ने इसे भगवान शिव का चमत्कार माना, जिसके बाद इस स्थान पर चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई। इस मंदिर में अर्धनारीश्वर मूर्ति की पूजा की जाती है। मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों का स्वरूप भी स्थापित है। हर बार की तरह इस महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों का बड़ा मेला लगा है।

रोजगारेश्वर महादेव मंदिर
जयपुर शहर के परकोटा क्षेत्र में एक शिव मंदिर है, जिसका नाम रोजगारेश्वर महादेव मंदिर है। मान्यता है कि इस मंदिर में जाकर सच्चे मन से पूजा-अर्चना और ध्यान करने से बेरोजगार लोगों को रोजगार मिलता है। इसी वजह से इस मंदिर का नाम रोजगारेश्वर मंदिर रखा गया। कुछ साल पहले जब जयपुर शहर के परकोटा क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन बनाया जाना था, तब यह मंदिर आड़े आ रहा था। तत्कालीन सरकार ने इस मंदिर को तुड़वा दिया और मेट्रो स्टेशन बनने के बाद मंदिर को उसी स्थान पर उसी स्वरूप में पुनः स्थापित किया गया। इस मंदिर में युवाओं की सबसे अधिक भीड़ रहती है।