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33 कोटि देवी-देवताओं के आशीर्वाद का फल देता है गणेशअष्टकम स्तोत्र का पाठ, वीडियो में जाने पाठ की सही विधि और सावधानियां 

 

भारत की आध्यात्मिक परंपरा में भगवान गणेश का स्थान सबसे पहले आता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत ‘श्री गणेशाय नमः’ से की जाती है। इन्हीं भगवान गणेश की स्तुति के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र स्तोत्र है गणेश अष्टकम, जिसे पढ़ने से ऐसा माना जाता है कि 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह केवल एक स्तोत्र नहीं बल्कि एक संपूर्ण साधना है, जो साधक को आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक रूप से समृद्धि प्रदान करती है।

<a href=https://youtube.com/embed/AQHjMP0_Q70?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/AQHjMP0_Q70/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="श्री गणेशाष्टकम् | Shri Ganesh Ashtakam | पंडित श्रवण कुमार शर्मा द्वारा | Ganeshashtak Hindi Lyrics" width="695">
क्या है गणेश अष्टकम?
'अष्टकम' का अर्थ है ऐसा स्तोत्र जिसमें आठ श्लोक होते हैं। गणेश अष्टकम एक ऐसा पावन ग्रंथ है जिसमें भगवान गणेश के गुण, स्वरूप, करुणा और कृपा का साक्षात्कार होता है। इसका नियमित पाठ साधक को बुद्धि, विवेक, बल, साहस और सफलता प्रदान करता है। यह स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचा गया है और इसकी पंक्तियों में अद्भुत छंद और लय है, जिससे पाठ करते हुए साधक को दिव्य ऊर्जा की अनुभूति होती है।

33 कोटि देवी-देवताओं से संबंध
भारतीय शास्त्रों में यह उल्लेख मिलता है कि ब्रह्मांड में 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं, और भगवान गणेश को 'सर्वदेवात्‍मक' यानी सभी देवताओं का प्रतिनिधि माना जाता है। जब हम गणेश अष्टकम का श्रद्धा से पाठ करते हैं, तो भगवान गणेश के माध्यम से इन सभी 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद हमें प्राप्त होता है। इसीलिए इसे बहु-फलदायक और सर्वमंगलकारी स्तोत्र कहा गया है।

पाठ की विधि – कैसे करें गणेश अष्टकम का पाठ?
गणेश अष्टकम का पाठ करने के लिए शुद्धता, श्रद्धा और नियम का पालन अत्यंत आवश्यक है। आइए जानें इसकी सही विधि:

1. स्थान और समय का चयन
सुबह सूर्योदय से पहले या शाम के समय पाठ करना शुभ होता है।
किसी शुद्ध स्थान पर आसन लगाकर बैठें — उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
एक दीपक जलाएं और गणपति की प्रतिमा या चित्र के समक्ष आसन ग्रहण करें।

2. शुद्धता और मानसिक एकाग्रता
स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।
मन को शांत करें और भगवान गणेश का ध्यान करें।

3. संकल्प लें
अपने उद्देश्य या मनोकामना को ध्यान में रखते हुए संकल्प लें।

4. गणपति पूजा करें
उन्हें दूर्वा, लाल फूल, मोदक, सिंदूर और हल्दी चढ़ाएं।
फिर विनायक गायत्री मंत्र या मूल मंत्र का उच्चारण करें।

5. गणेश अष्टकम का पाठ
स्तोत्र का उच्चारण स्पष्ट, श्रद्धा एवं समर्पण भाव से करें।
चाहें तो शंख या घंटी बजा सकते हैं, जिससे वातावरण पवित्र रहता है।

6. आरती और प्रार्थना
पाठ के बाद गणेश आरती करें और अपनी प्रार्थना करें।

कौन कर सकता है यह पाठ?
गणेश अष्टकम का पाठ कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्त्री या पुरुष, विद्यार्थी या व्यवसायी। विशेष रूप से यह स्तोत्र उन लोगों के लिए लाभकारी है जिन्हें:
निर्णय लेने में कठिनाई होती हो।
पढ़ाई में एकाग्रता की कमी हो।
करियर में बाधा आ रही हो।
बार-बार विघ्नों का सामना करना पड़ रहा हो।

क्या हैं सावधानियां?
गणेश अष्टकम का पाठ करते समय कुछ सावधानियां बरतना ज़रूरी है ताकि इसका पूर्ण फल प्राप्त हो सके:
अपवित्र अवस्था में पाठ न करें – जैसे कि गंदे कपड़ों में, स्नान के बिना या मन अशांत हो।
शब्दों का उच्चारण गलत न करें – स्तोत्र संस्कृत में है, गलत उच्चारण से भावार्थ बिगड़ सकता है।
कुपात्र पर इसका उपयोग न करें – इस स्तोत्र का पाठ केवल अपने कल्याण और शुभ कार्यों के लिए करें, किसी को नीचा दिखाने या दुर्भावना से नहीं।
पाठ के बाद व्यर्थ वार्तालाप से बचें – पाठ के बाद कुछ समय तक शांत रहें।
मसालेदार भोजन, मांसाहार या नशे से परहेज करें – पाठ के दिनों में सात्विक जीवनशैली अपनाएं।

विशेष अवसरों पर इसका महत्त्व
गणेश चतुर्थी पर इसका पाठ विशेष फलदायक होता है।
संकष्टी चतुर्थी को उपवास के साथ यह स्तोत्र पढ़ने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।
नई शुरुआत या किसी कार्य की नींव रखने से पहले इसका पाठ करने से सफलता सुनिश्चित होती है।