करणी माता मंदिर का वो रहस्य जो आज भी है अनसुलझी पहेली, वीडियो में जानकर आप भी रह जाएंगे दंग
यह सच है कि हमारे देश भारत की खूबसूरती उसके मंदिरों से और भी बढ़ जाती है। मंदिर ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को अपनी चिंता भरी जिंदगी से मुक्ति मिलती है, जीवन में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता है और सकारात्मक ऊर्जा का एहसास होता है। इस देश में लाखों मंदिर हैं लेकिन कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जिनके साथ अलग-अलग प्रथाएं जुड़ी हुई हैं और वे इन प्रथाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। आज तक विज्ञान भी इस मंदिर से जुड़े रहस्यों के पीछे की वजह का पता नहीं लगा पाया है।
करणी माता मंदिर की संरचना
राजस्थान के बीकानेर में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर देवी करणी माता को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 20वीं शताब्दी में बीकानेर में हुआ था। करणी माता राजस्थान के बीकानेर में स्थित एक भव्य मंदिर है, जिसे राजपूत और मुगल स्थापत्य शैली का उपयोग करके बनाया गया है। करणी माता का मंदिर संगमरमर के पत्थरों से बना है। यह मंदिर देखने में बेहद आकर्षक और खूबसूरत लगता है। इस मंदिर की संरचना इस मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है।
इसके साथ ही मां जगदंबा का अवतार मानी जाने वाली करणी माता के मंदिर की खिड़कियों, दरवाजों और दीवारों पर बेहतरीन शिल्पकला है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है। हिंदुओं की धार्मिक आस्था से जुड़े इस प्रसिद्ध मंदिर के दरवाजे बीकानेर राज्य के महाराजा गंगा सिंह ने चांदी से बनवाए थे। इस मंदिर पर लगा सोने का छत्र और चूहों के खाने के लिए रखी गई चांदी की विशाल थाली भी मंदिर का मुख्य आकर्षण है। इस मंदिर की धार्मिक मान्यता और सुंदरता को देखने और करणी माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।
करणी माता मंदिर का रहस्य
जहां हम किसी इंसान का बचा हुआ खाना खाने से कतराते हैं, वहीं इस मंदिर में चूहों का बचा हुआ प्रसाद खाने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर में करीब 25,000 चूहे हैं और इन चूहों को करणी माता की संतान माना जाता है। इस मंदिर में प्रवेश करने वाले सभी भक्तों को इस बात का खास ध्यान रखना पड़ता है कि चूहों को गलती से भी कोई नुकसान न पहुंचे क्योंकि यह मंदिर उन्हीं का है और यहां उन्हीं की पूजा होती है। यह काफी हैरान करने वाली बात है लेकिन इस मंदिर में बनने वाला प्रसाद भी सबसे पहले चूहों को खिलाया जाता है और उसके बाद ही भक्तों में बांटा जाता है। मंदिर में सफेद चूहे का दिखना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जब मंदिर में सुबह और शाम करणी माता की आरती होती है तो सभी चूहे दर्शन के लिए मूर्ति के पास आते हैं, जहां माता की आरती हो रही होती है।