×

राजस्थान के इस जिले में स्थित है भगवान श्री हरी विष्णु का 1100 साल पुराना मंदिर, मंदिर का नाम जानकर आपको भी नहीं होगा यकीन 

 

कहते हैं कि अगर किसी को अलग-अलग संप्रदायों को देखना हो तो उसे भारत जरूर आना चाहिए। वो इसलिए क्योंकि भारत ही एक ऐसा देश है जहां हर धर्म के लोग एकता के साथ रहते हैं। यही वजह है कि यहां कई तरह के धार्मिक स्थल और मंदिर आदि की भरमार है। यहां सिर्फ देवी-देवताओं के अनोखे मंदिर ही नहीं हैं बल्कि कई ऐसे विचित्र मंदिर हैं जिनके रहस्य इतने रोचक हैं कि सुनने वाला दंग रह जाता है। तो चलिए आज जानते हैं ऐसे ही मंदिर के बारे में जहां भगवान विष्णु विराजते हैं लेकिन मंदिर का नाम उनके नाम पर नहीं बल्कि सास-बहू मंदिर है।

<a href=https://youtube.com/embed/PTKeFkJOmco?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/PTKeFkJOmco/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Sharad Purnima 2024 | शरद पूर्णिमा 2024 कब है, मुहूर्त, पूजा विधि, खीर का महत्व, व्रत, आरती और कथा" width="1250">

ससे पहले कि आपका दिमाग सवालों के चक्रव्यूह में खो जाए हम आपको बताते हैं कि भगवान विष्णु के इस मंदिर का नाम सास-बहू कैसे और क्यों पड़ा। आपको बता दें कि हम बात कर रहे हैं राजस्थान के उदयपुर से दूर नागदा गांव में स्थित मंदिर की जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में कच्छवाहा वंश के राजा महिपाल राज करते थे जिनकी पत्नी भगवान विष्णु की बहुत बड़ी भक्त थीं। उनकी पूजा को ध्यान में रखते हुए यहां सहस्त्रबाहु नाम का मंदिर बनवाया गया।

कुछ सालों बाद रानी के बेटे की शादी हो गई और उनकी बहू भगवान शिव की पूजा करती थी। इसलिए राजा ने अपनी बहू के लिए उसी मंदिर के पास भगवान शिव का मंदिर बनवाया। जिसके बाद से दोनों मंदिरों को सहस्त्रबाहु के नाम से जाना जाने लगा।

सहस्त्रबाहु से बना सास-बहू मंदिर
आपको बता दें कि मंदिर में सबसे पहले भगवान विष्णु की स्थापना हुई थी, इसलिए इसका नाम सहस्त्रबाहु पड़ा। हिंदू धर्म के अनुसार इसका मतलब 'हजार भुजाओं वाला' होता है। बाद में इसका सही उच्चारण न कर पाने के कारण यह मंदिर प्राचीन सहस्त्रबाहु मंदिर सास-बहू मंदिर हो गया।

इतना पुराना है यह मंदिर
मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 1100 साल पहले कच्छपघाट वंश के राजा महिपाल और रत्नपाल ने करवाया था। कहा जाता है कि बड़ा मंदिर माता के लिए और छोटा मंदिर रानी के लिए बनवाया गया था। तभी से यह मंदिर सास-बहू के नाम से प्रसिद्ध है। परिसर में श्री हरि विष्णु की 32 मीटर ऊंची और 22 मीटर चौड़ी सौ भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है।