×

Chanakya Niti कुल की मान मर्यादा को मिट्टी में मिला देती है ऐसी संतान, माता पिता हो जाते हैं शर्मसार 

 

ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: आचार्य चाणक्य को भारत के महान ज्ञानियों और विद्वानों में से एक माना गया है। इनकी नीतियां दुनियाभर में प्रसिद्ध है जिसे चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है। चाणक्य ने मानव जीवन से जुड़े सभी पहलुओं पर अपनी नीतियों का निर्माण किया है

<a href=https://youtube.com/embed/vbq-YJwS2cE?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/vbq-YJwS2cE/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

जिसका अनुसरण करने वाला मनुष्य सफलता, सुख और सम्मान हासिल करता है। चाणक्य ने संतान के कुद अवगुण के बारे में बताया है जो परिवार की मान मर्यादा को मिट्टी में मिला देती हैं तो आइए जानते हैं आज की चाणक्य नीति। 

<a href=https://youtube.com/embed/FgMtq9fSLMg?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/FgMtq9fSLMg/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

संतान से जुड़ी चाणक्य नीति—
आचार्य चाणक्य के अनुसार एक गुणवान पुत्र अपने गुणों के दम पर ख्याति हासिल करता है। जिस तरह जंगल में सुंदर और सुगंधित फूलों वाला वृक्ष अपनी खुशबू से पूरे वन को महका देता है।

<a href=https://youtube.com/embed/9XRNwL57KXs?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/9XRNwL57KXs/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

ठीक उसी तरह गुणवान पुत्र पूरे कुल का नाम भी समाज में रौशन करता है। गुणी पुत्र अपने वंश को मान सम्मान दिलाता है और माता पिता को सुख प्रदान करता है। 

चाणक्य नीति अनुसार जिस तरह एक सूखे पेड़ में आग लगने की वजह से पूरा जंगल दहक जाता है वैसे ही एक कुपुत्र पूरे कुल के मान सम्मान को मिट्टी में मिला देता है। चाणक्य नीति कहती है कि कुल में कपूत पैदा होने से कुल को बदनामी मिलती है। यही कारण है कि गृहस्थ जीवन जीने वालों को अपनी संतान को शिक्षा, सद्गुणों और मर्यादा का पाठ पढ़ाना चाहिए। जिससे वह सपूत बनकर नाम करें।