उज्जैन के वाग्देवी मंदिर में स्याही से होता है नील सरस्वती का अभिषेक
ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: हिंदू धर्म में पूजा पाठ के साथ साथ तीर्थ स्थल को भी विशेष माना जाता हैं वही धर्मधानी उज्जयिनी में ज्ञान की अधिकष्ठात्री देवी मा सरस्वती का प्राचीन मंदिर हैं वाग्देवी मंदिर में देवी नील सरस्वती के रूप में विराजमान हैं वसंत पंचमी पर विद्धार्थी स्याही से उनका अभिषेक करते हैं और विशेष पूजा आराधना भी करते हैं तो आज हम आपको इस विशेष मंदिर के बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
यहां वसंत पंचमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता हैं विद्यार्थियों के अलावा देवी का दर्शन पूजन करने भारी भीड़ जुटती हैं सिंहपुरी के समीप बिजासन पीठ के सामने स्थित इस मंदिर में परीक्षा के दिनों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी नील सरस्वती के दर्शन करने आते हैं वसंत पंचमी पर भी भीड़ बढ़ जाती है क्योंकि कुछ दिनों बाद ही परीक्षाएं भी शुरू होने वाली होती हैं
छात्र देवी का स्याही से अभिषेक कर परीक्षा में सफलता की प्रार्थना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नील सरस्वती का स्याही से अभिषेक पूजन करने से मन पढ़ाई में लगता हैं ध्यान केंद्रित करने का संकल्प बलवती हो जाता हैं और सफलता मिलती हैं छात्र उच्च अंकों से उत्तीर्ण होते हैं इसी मान्यता के चलते स्थानीय के साथ दूरदराज से भी स्वजन बच्चों को लेकर माता के दरबार में आते हैं।
हिंदू धर्म के 16 आधारभूत संस्कारों में से एक विद्यारंभ संस्कार को विशेष रूप से वसंत पंचमी तिथि पर किए जाने की मान्यता है संगीत की गुरु शिष्य परंपरा में भी वसंत पंचमी का विशेष महत्व होता हैं। उज्जैन के इस प्राचीन मंदिर में वसंत पंचमी पर वाग्देवी को वासंती फूलों के साथ नील कमल व अष्टर के पुष्प अर्पित करने का विधान हैं इसका उल्लेख श्रीमद देवी भागवत में मिलता हैं नील सरस्वती के पूजन में नील कमल व अष्टर के नीले फूलों का उपयोग इसी कारण होता हैं इन फूलों के अर्क से देवी का अभिषेक किया जाता हैं समय के साथ इसमें परिवर्तन आया और फूलों के अर्क का स्थान नीली स्याही ने ले लिया।