×

9 अक्टूबर को सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या, इस दिन भूलकर भी न करें 8 काम

 

जयपुर। आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या कहा जाता हैं। इस दिन को पितृपक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। पितृ पक्ष में इस दिन श्राद्ध करने से पितृदोषों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही किसी की मृत्यु की तिथी का पता नहीं है तो इसके लिए भी श्राद्ध पक्ष की अमावस्या की तिथि को किया जाता है। इस अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस साल 9 अक्टूबर यानि  मंगलवार के दिन सर्वपितृ अमावस्या है। इसके साथ ही पितृ पक्ष का यह आखिरी दिन भी माना जाता है। इसके अगले दिन से नवरात्रि की शुरुआत होती है।

आज इस लेख में हम श्राद्ध पक्ष के आखिरी दिन को लेकर कुछ विशेष उपाय बता रहें हैं इन उपाय को करने से पितर प्रसन्न होतो है इन की कृपा जीवन में बनी रहती है। पितर पक्ष पूरे 16 दिनों तक रहते हैं। इसके साथ ही इन 16 दिनों में सात्विक भोजन करना चाहिए व शरीर में तेल नहीं लगाना चाहिए।

  • श्राद्ध पक्ष की अमावस्या में किसी दूसरे शहर की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही किसी पर गुस्सा नहीं करना चाहिए।
  • अमावस्या के दिन बगैर संकल्प के श्राद्ध नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही श्राद्ध के अंतिम दिन हाथ में अक्षत, चंदन,फूल और तिल लेकर पितरों का तर्पण करें।

  • श्राद्ध में चना, मसूर, उड़द, सत्तू, मूली, काला जीरा, खीरा, काला नमक, काला उड़द, व अपवित्र भोजन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • श्राद्ध में ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराना चाहिए व अपनी सामर्थ के अनुसार दान देना चाहिए। ऐसा करने से पितृदोषों से मुक्ति मिलती चाहिए।