वीडियो में जानिए कौन सी है वो 10 गलतियां जो शिव चालीसा पाठ के दौरान पड़ सकती है भारी ? नहीं मिलेगी भोलेनाथ की कृपा
शिव चालीसा तुलसीदास द्वारा रचित माना जाता है और यह भगवान शिव के विभिन्न रूपों, उनके गुणों और लीलाओं का वर्णन करता है। इसका पाठ विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन मास और श्रावण सोमवार के दिनों में किया जाता है, लेकिन किसी भी दिन श्रद्धा से किया जाए तो भी फलदायी होता है।शिव चालीसा मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति, दरिद्रता नाश और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रभावशाली मानी जाती है। लेकिन पाठ करते समय यदि कुछ गलतियाँ हो जाएँ, तो न केवल फल में कमी आती है, बल्कि अनजाने में दोष भी लग सकते हैं।
शिव चालीसा पाठ के दौरान होने वाली आम गलतियाँ
1. शिव चालीसा को जल्दबाजी में पढ़ना
कई बार लोग समय की कमी के कारण जल्दी-जल्दी शिव चालीसा पढ़ते हैं। इससे पाठ में त्रुटियाँ होती हैं और भाव नहीं बनता। शिव चालीसा भावपूर्ण पाठ की मांग करती है। जल्दबाजी में किए गए पाठ से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार नहीं होता और न ही इच्छित फल मिलता है।
2. शुद्ध उच्चारण की अनदेखी
शिव चालीसा संस्कृत और अवधी के शब्दों से युक्त है। गलत उच्चारण से शब्दों का अर्थ बदल सकता है, जिससे पाठ का प्रभाव घट सकता है। इसलिए पढ़ने से पहले शुद्ध उच्चारण का अभ्यास करना चाहिए या फिर अनुभवी व्यक्ति से मार्गदर्शन लेना चाहिए।
3. पाठ से पहले मन की अशुद्धि
भगवान शिव ध्यान और तप के देवता हैं। यदि पाठ करने वाला व्यक्ति क्रोध, द्वेष, या चिंता की स्थिति में हो, तो उसकी मानसिक स्थिति पाठ के प्रभाव को प्रभावित कर सकती है। पाठ से पहले मन को शांत कर लेना आवश्यक है।
4. अपवित्र अवस्था में पाठ करना
शिव चालीसा का पाठ करते समय शरीर की पवित्रता आवश्यक होती है। स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र पहनकर ही पाठ करना चाहिए। स्त्रियों को मासिक धर्म के दौरान पाठ से परहेज करना चाहिए, जब तक शुद्धता ना हो।
5. गलत दिशा में बैठकर पाठ करना
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पूजन और पाठ के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ होता है। इससे ऊर्जा प्रवाह सकारात्मक होता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पाठ करना वर्जित नहीं है, लेकिन उतना लाभकारी नहीं माना गया है।
6. पाठ स्थल की अस्वच्छता
जहाँ शिव चालीसा का पाठ किया जा रहा हो, वह स्थान स्वच्छ और शांत होना चाहिए। मोबाइल, टीवी या शोरगुल वाले स्थान पर पाठ से ध्यान भंग होता है और श्रद्धा में कमी आती है।
7. भगवान शिव की उपेक्षा करना
केवल चालीसा पढ़ लेना ही पर्याप्त नहीं, भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग के सामने दीप, जल, बेलपत्र आदि से पूजन करना भी आवश्यक है। यदि पूजन विधि की उपेक्षा की जाती है, तो पाठ का प्रभाव सीमित हो सकता है।
8. भक्तिभाव की कमी
शिव चालीसा पाठ का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव के प्रति समर्पण है। यदि पाठ केवल औपचारिकता या स्वार्थवश किया जाए, तो उसकी आत्मिक शक्ति घट जाती है। श्रद्धा और विश्वास ही पाठ को पूर्णता प्रदान करते हैं।
9. पाठ के तुरंत बाद सांसारिक कार्यों में लग जाना
पाठ के तुरंत बाद यदि व्यक्ति शोर-शराबे या सांसारिक व्यस्तताओं में लग जाता है, तो उसका ध्यान भटक जाता है और पाठ से उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा का लाभ नहीं मिल पाता। पाठ के बाद कुछ क्षण ध्यान और मौन में बिताना चाहिए।
10. शिव चालीसा को मात्र संकट निवारण का उपाय मानना
कई लोग शिव चालीसा को केवल संकट में ही पढ़ते हैं और जब हालात सुधरते हैं, तो पाठ बंद कर देते हैं। भगवान शिव केवल संकटों के देवता नहीं, वे जीवन में संतुलन और आशीर्वाद देने वाले हैं। शिव चालीसा का नियमित पाठ ही उसका असली प्रभाव देता है।
शिव चालीसा पाठ की शुद्ध विधि
स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
सामने शिवलिंग या भगवान शिव की मूर्ति/चित्र रखें
दीपक जलाएं, जल और बेलपत्र अर्पण करें
आंखें बंद करके कुछ क्षण ध्यान करें
श्रद्धा भाव से शिव चालीसा का पाठ करें
पाठ के बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें
अंत में प्रार्थना करें और आभार व्यक्त करें
शिव चालीसा का पाठ एक शक्तिशाली साधना है, लेकिन इसे करते समय अगर श्रद्धा और विधि का पालन न किया जाए तो उसके प्रभाव में कमी आ सकती है। उपरोक्त बताई गई गलतियों से बचकर, शुद्धता और भक्ति के साथ शिव चालीसा का पाठ करें, तो न केवल जीवन के कष्ट दूर होंगे, बल्कि आत्मिक शांति और भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त होगी।