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कुरुक्षेत्र में हुआ शीशदान फिर राजस्थान में कैसे पहुंचा बर्बरीक का सिर ? वायरल डॉक्यूमेंट्री में जाने जानिए पौराणिक कथा

 

महाभारत युद्ध में कई वीर योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन एक योद्धा ऐसा भी था जो एक ही बाण से महाभारत युद्ध को समाप्त करने की शक्ति रखता था। उस योद्धा का नाम बर्बरीक था जो पांडु पुत्र भीम का पौत्र था। बर्बरीक के पास दैवीय शक्तियां थीं। कलियुग में बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है। राजस्थान के सीकर में बाबा खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर है। इस मंदिर में बर्बरीक के सिर की पूजा की जाती है।

<a href=https://youtube.com/embed/bT30sShYbPc?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/bT30sShYbPc/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Khatu Shyam Mandir | खाटू श्याम मंदिर का पवित्र इतिहास, दर्शन, कैसे जाएँ, कथा, मान्यता और लक्खी मेला" width="695">
बर्बरीक और महाभारत का संबंध
महाभारत युद्ध में बर्बरीक का योगदान बहुत बड़ा माना जाता है, भले ही उन्होंने युद्ध नहीं लड़ा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार बर्बरीक के पास तीन ऐसे बाण थे जिनसे युद्ध को पल भर में समाप्त किया जा सकता था। बर्बरीक को वरदान था कि वह तीन बाणों से तीनों लोकों को जीत सकता था। युद्ध पर जाते समय उसने अपनी मां से कहा कि मैं युद्ध हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ूंगा। इसीलिए खाटू श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है। 

श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उसका सिर दान करने को कहा
जब भगवान कृष्ण को पता चला कि बर्बरीक इस युद्ध में भाग लेने आ रहा है तो वे चिंतित हो गए क्योंकि वे जानते थे कि बर्बरीक उस पक्ष का साथ देगा जो युद्ध हार रहा होगा। तब श्री कृष्ण ने अपनी कूटनीति से बर्बरीक से उसका सिर दान करने को कहा और बर्बरीक ने अपनी तलवार निकालकर अपना सिर श्री कृष्ण को अर्पित कर दिया। बर्बरीक के इस बलिदान को देखकर श्री कृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया।

इस तरह बर्बरीक का सिर राजस्थान पहुंचा
भगवान श्री कृष्ण को अपना सिर दान करने के बाद उसने पूरा युद्ध देखने की इच्छा जताई। बर्बरीक की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक का कटा हुआ सिर एक पहाड़ी पर स्थापित कर दिया जहां से बर्बरीक ने पूरा युद्ध देखा। किवदंती के अनुसार युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के सिर को आशीर्वाद दिया और रूपवती नदी में प्रवाहित कर दिया।

ऐसा माना जाता है कि कलियुग में बर्बरीक का सिर सीकर के खाटू गांव की मिट्टी में दबा हुआ मिला था। कहा जाता है कि जब एक गाय श्मशान घाट को पार कर रही थी तो उसके थनों से दूध बहने लगा। यह चमत्कार देखकर गांव वालों ने उस जगह की खुदाई की। जिसमें बर्बरीक का सिर मिला जिसे भगवान कृष्ण ने नदी में विसर्जित कर दिया था। बर्बरीक का सिर मिलने के बाद खाटू गांव के राजा रूप सिंह को स्वप्न आया जिसमें उन्हें मंदिर बनवाकर उसमें सिर स्थापित करने का आदेश दिया गया और राजा ने वैसा ही किया। मान्यता है कि आज वहां खाटू श्याम का तालाब है, जहां बर्बरीक जी का सिर भी मिला था। इसलिए इस तालाब की भी विशेष मान्यता है।