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माता लक्ष्मी के एकदम विपरीत स्वभाव रखती है उनकी बड़ी बहन 'अलक्ष्मी', वीडियो में जानिए उनकी उत्पत्ति और क्यों कहा जाता है दुर्भाग्य की देवी ?

 

शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी को समर्पित है। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं और उन्हें धन और समृद्धि देने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी देवी अलक्ष्मी के बारे में सुना है? देवी अलक्ष्मी देवी लक्ष्मी की बड़ी बहन हैं। इनका भी अवतार समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। शास्त्रों में देवी अलक्ष्मी का स्वरूप जगत जननी देवी लक्ष्मी से बिल्कुल विपरीत बताया गया है। अलक्ष्मी और लक्ष्मी कभी एक साथ नहीं रहती हैं। जहां दरिद्रता, कष्ट और गंदगी होती है, वहां अलक्ष्मी का वास होता है। नरक चतुर्दशी के दिन जब घर की सफाई होती है तो अलक्ष्मी घर से चली जाती हैं। इसके बाद दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी का आगमन होता है। जानिए अलक्ष्मी के बारे में रोचक जानकारी।

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दुर्भाग्य की देवी हैं देवी अलक्ष्मी
देवी लक्ष्मी का अवतार समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। लेकिन देवी अलक्ष्मी उनसे पहले अवतरित हुई थीं। ऐसा माना जाता है कि वे समुद्र मंथन के समय कालकूट के बाद प्रकट हुई थीं। इनका स्वरूप देवी लक्ष्मी से बिलकुल विपरीत था। इन्हें दुर्भाग्य की देवी माना जाता है, इसीलिए देवी अलक्ष्मी का चित्र नहीं लगाया जाता। देवी अलक्ष्मी के प्रकट होने के समय वे वृद्ध थीं। उनके बाल पीले, आंखें लाल और चेहरा काला था। समुद्र से निकलने के बाद देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को चुना जबकि देवी अलक्ष्मी ने आसुरी शक्तियों की शरण ली। इसीलिए इनकी गिनती रत्नों में नहीं की जाती। इनके प्रकट होने के समय देवताओं ने कहा था कि तुम उस घर में निवास करोगी जहां कलह हो और तुम हड्डियों, कोयले, बालों और भूसी में निवास करोगी। तुम उन लोगों को दरिद्र बना दोगी जो कठोर झूठ बोलते हैं, जो शाम को बिना हाथ-मुंह धोए भोजन करते हैं और मांसाहारी भोजन करते हैं।

विवाह के संबंध में मान्यता
लिंग पुराण के अनुसार अलक्ष्मी का विवाह दुसह नामक ब्राह्मण से हुआ था और उसके पाताल लोक चले जाने के बाद वे यहां अकेली रह गईं। इसके बाद वे पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगीं। मान्यता है कि शनिवार के दिन देवी लक्ष्मी अपनी बड़ी बहन से मिलने आती हैं। इसीलिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में खुशहाली आती है। हालांकि, एक मान्यता यह भी है कि देवी अलक्ष्मी का विवाह उद्दालक नाम के ऋषि से हुआ था। लेकिन जब ऋषि उन्हें आश्रम ले गए तो देवी अलक्ष्मी ने अंदर जाने से मना कर दिया क्योंकि वहां बहुत साफ-सफाई थी। अलक्ष्मी ने ऋषि से कहा था कि वह केवल ऐसे घरों में ही रह सकती हैं जहां गंदगी, झगड़े और अन्याय हो। इस वजह से वह कभी अपने पति के साथ नहीं रह पातीं। यही वजह है कि उनकी तस्वीर में वह हमेशा अकेली ही नजर आती हैं।

अलक्ष्मी के प्रभाव से बचने के उपाय
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि जिन घरों में धन की हानि, झगड़े और क्लेश होते हैं, वहां देवी अलक्ष्मी का प्रभाव होता है। अगर आप अपने घर को अलक्ष्मी से बचाना चाहते हैं तो साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें क्योंकि इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है। जहां लक्ष्मी होती हैं, वहां से अलक्ष्मी चली जाती हैं। छोटी दिवाली के दिन घर में मौजूद कबाड़ को बाहर फेंक दिया जाता है और घर की साफ-सफाई की जाती है। दरअसल, ऐसा करने से अलक्ष्मी को घर से बाहर भेजा जाता है ताकि दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी घर में आ सकें। कबाड़, टूटे हुए कांच या धातु के बर्तन, किसी भी तरह का टूटा हुआ सजावटी सामान, बेकार फर्नीचर आदि को नर्क के बराबर माना जाता है। छोटी दिवाली तक इस कबाड़ को किसी भी कीमत पर घर से बाहर फेंक देना चाहिए।