इस विधि से करे चमत्कारी शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप घर में कभी नहीं होगी धन की कमी, मां लक्ष्मी सदा भर्ती रहेंगी भण्डार
भारतीय संस्कृति में भगवान शिव को "आदियोगी", "महादेव" और "त्रिलोकनाथ" के नाम से जाना जाता है। उन्हें न केवल संहार का देवता माना जाता है, बल्कि पुनर्निर्माण और पुनर्जन्म का भी स्वामी माना जाता है। शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल और कारगर उपाय है उनका पंचाक्षरी मंत्र - "ॐ नमः शिवाय"। यदि इस मंत्र का प्रतिदिन एक विशिष्ट विधि से जाप किया जाए, तो न केवल मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि धन, समृद्धि और खुशहाली भी आती है। कहा जाता है कि इस मंत्र से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती।
पंचाक्षरी मंत्र: शिव से सीधे जुड़ने वाला मंत्र
"ॐ नमः शिवाय" एक बहुत ही पवित्र मंत्र है, जिसमें पांच प्रमुख अक्षर हैं - न, म, शि, वा, य। इन पांच अक्षरों के कारण ही इसे 'पंचाक्षरी मंत्र' कहा जाता है। यह मंत्र न केवल शिव की स्तुति है, बल्कि एक आध्यात्मिक स्पंदन है जो साधक को शिव से जोड़ता है।
मंत्र जाप की इस खास विधि से होगी लक्ष्मी की कृपा
अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में कभी भी धन-धान्य की कमी न हो और मां लक्ष्मी हमेशा आपके भंडार को भरती रहें, तो नीचे दी गई विधि से पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें:
विशेष जाप विधि:
सुभाषित ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) में उठें।
यह समय साधना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
स्नान करके साफ कपड़े पहनें - हो सके तो सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
शिवलिंग या शिव चित्र के सामने दीपक जलाएं।
बेलपत्र, सफेद फूल, कच्चा दूध, जल और अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
रुद्राक्ष की माला लें और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।
जाप करते समय अपनी दृष्टि शिवलिंग या शिव की आंखों पर रखें।
जाप के बाद कपूर की आरती करें और मां लक्ष्मी से अपने घर में धन, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।
यह विधि लगातार 21 दिनों तक करें।
खास तौर पर सोमवार को इसका असर और भी चमत्कारी होता है।
इस मंत्र से कैसे प्रसन्न होती हैं मां लक्ष्मी?
भले ही पंचाक्षरी मंत्र शिव का है, लेकिन भगवान शिव स्वयं "वैराग्य" के प्रतीक होते हुए भी लक्ष्मीपति विष्णु की तरह संपूर्णता दर्शाते हैं। शिव त्याग हैं तो शक्ति भी हैं।इस मंत्र से जैसे ही साधक शिव को प्रसन्न करता है, उसका मन शुद्ध हो जाता है और भय, अभाव और दुर्भावना समाप्त हो जाती है। यह पवित्रता मां लक्ष्मी को आकर्षित करती है क्योंकि वे "सत्व गुण" से जुड़ी हैं। जहां शुद्ध मन, सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प है - वहां लक्ष्मी अपने आप आती हैं।
पंचाक्षरी मंत्र और धन-समृद्धि का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
ध्यान और जप के दौरान उत्पन्न ध्वनि कंपन न केवल मन को शांत करते हैं, बल्कि वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भी फैलाते हैं। "ओम नमः शिवाय" का निरंतर जाप ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ सामंजस्य स्थापित करता है और आपके चारों ओर एक ऐसा कंपन पैदा करता है जो आकर्षण के नियम के अनुसार धन, अवसर और सौभाग्य को आकर्षित करता है।
यह मंत्र भौतिक ही नहीं, आध्यात्मिक समृद्धि भी देता है
जहाँ एक ओर यह मंत्र घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने का साधन है, वहीं दूसरी ओर यह अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या जैसी मानसिक जटिलताओं को भी काटता है। शिव का स्मरण आत्मा को उसके मूल स्वरूप - शिवस्वरूप की ओर ले जाता है।
निष्कर्ष
यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन से दरिद्रता, बाधाएँ और असफलताएँ दूर हों, तथा उनके स्थान पर लक्ष्मी, शुभता और सफलता का वास हो - तो आज से ही शिव के पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का विशेष विधि से जाप करना शुरू कर दें।आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आने लगेंगे - मन शांत हो जाएगा, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और धन-समृद्धि की वर्षा अपने आप होने लगेगी।