क्या महामृत्युंजय जाप से रुक सकती है मृत्यु? वीडियो में जानिए मार्कंडेय की कथा और इस मंत्र की रहस्यमयी शक्ति
क्या केवल एक मंत्र का जाप मृत्यु को टाल सकता है? क्या वाकई कोई ऐसा उपाय है जिससे जीवन की अंतिम सीमा को लांघा जा सकता है? इन सवालों के जवाब में हिंदू धर्म के एक दिव्य और रहस्यमय मंत्र का नाम सबसे पहले सामने आता है – महामृत्युंजय मंत्र। यह मंत्र, जिसे 'त्र्यम्बकम् मंत्र' भी कहा जाता है, भगवान शिव को समर्पित है और इसका उच्चारण जीवन, स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
क्या है महामृत्युंजय मंत्र?
यह मंत्र ऋग्वेद में मिलता है और इसका उल्लेख यजुर्वेद तथा अथर्ववेद में भी होता है। मंत्र इस प्रकार है:
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥”
इस मंत्र का अर्थ है – हम त्रिनेत्र वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो संपूर्ण जगत को पोषण देने वाले और सुगंधित हैं। वे हमें मृत्यु के बंधन से छुड़ाएं, जैसे ककड़ी (उर्वारुक) बेल से अलग हो जाती है, और हमें अमरत्व प्रदान करें।
पौराणिक कथा: जब मृत्यु पर भारी पड़ा महामृत्युंजय मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा महर्षि मृकंडु और उनके पुत्र मार्कंडेय की है। कहा जाता है कि मृकंडु ऋषि ने शिव की तपस्या कर संतान प्राप्ति का वर मांगा। शिव ने उन्हें दो विकल्प दिए – एक अल्पायु किंतु अत्यंत तेजस्वी पुत्र, या दीर्घायु किंतु सामान्य बुद्धि वाला पुत्र। मृकंडु ने तेजस्वी पुत्र का चयन किया, जिससे मार्कंडेय का जन्म हुआ।जब मार्कंडेय 16 वर्ष के हुए, तो यमराज उन्हें लेने आए। लेकिन बालक मार्कंडेय शिवलिंग से लिपटकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने लगे। शिव प्रसन्न हुए और यमराज को रोक दिया। भगवान शिव ने मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया। यही कारण है कि महामृत्युंजय मंत्र को मृत्यु पर विजय दिलाने वाला मंत्र माना जाता है।
आधुनिक समय में इसकी प्रासंगिकता
भले ही वैज्ञानिक युग हो, लेकिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप आज भी अस्पतालों, जीवन-मरण की स्थिति में पड़े लोगों के घरों में, और गंभीर संकटों के समय किया जाता है। कई डॉक्टरों और आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि इस मंत्र के उच्चारण से मानसिक शांति मिलती है, रक्तचाप नियंत्रित होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।वर्ष 2020 की कोरोना महामारी के दौरान कई जगहों पर सामूहिक महामृत्युंजय जाप किए गए थे। परिजनों ने ICU में भर्ती मरीजों के लिए ऑनलाइन मंत्रोच्चार करवाए। कई लोगों ने इसे 'आखिरी उम्मीद' बताया।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या कहता है?
वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो किसी भी मंत्र का नियमित और श्रद्धापूर्वक जाप मानसिक संतुलन बनाता है। जब कोई व्यक्ति गहरे विश्वास के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करता है, तो उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर संतुलित रहता है, मस्तिष्क की तरंगें स्थिर होती हैं और तनाव का स्तर घटता है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और जीवन की जटिल परिस्थितियों में आशा का संचार होता है।
क्या मृत्यु को रोका जा सकता है?
यह सवाल सदा से जिज्ञासा का विषय रहा है। हिन्दू शास्त्र भी मानते हैं कि मृत्यु एक अटल सत्य है। लेकिन महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ केवल 'मृत्यु से मुक्ति' नहीं है, बल्कि यह आत्मा को मृत्यु के भय से मुक्त करने और जीवन की शुद्धता को बनाए रखने का एक साधन है।धार्मिक मान्यता कहती है कि यह मंत्र केवल शारीरिक मृत्यु ही नहीं, बल्कि मानसिक, आत्मिक और आध्यात्मिक बंधनों से भी मुक्ति दिलाता है। मृत्यु की वास्तविक पराजय तब होती है जब मनुष्य भय, मोह, क्रोध और अज्ञान से मुक्त होता है – और यही महामृत्युंजय मंत्र का असली संदेश है।
सामाजिक और धार्मिक प्रभाव
आज भी ग्रामीण भारत से लेकर महानगरों तक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप जीवन की हर संकटपूर्ण घड़ी में किया जाता है। बच्चे के जन्म से लेकर गंभीर रोग, यात्रा, आपदा या गृहकलह जैसी स्थितियों में लोग इस मंत्र को सुरक्षा कवच मानकर अपनाते हैं। कई मंदिरों में रात्रि जागरण या विशेष पूजा में इसका जाप अनिवार्य रूप से किया जाता है।
निष्कर्ष: क्या महामृत्युंजय मंत्र से मौत पर विजय पाना संभव है?
शब्दों की शक्ति, आस्था की ऊर्जा और आत्मविश्वास का संगम यदि किसी एक तत्व में दिखता है, तो वह महामृत्युंजय मंत्र है। यह मंत्र किसी जादू की तरह कार्य नहीं करता, बल्कि मन, शरीर और आत्मा को एक ऐसी सकारात्मक स्थिति में लाता है जहाँ भय और मृत्यु की चिंता पीछे छूट जाती है। इसलिए, कहना गलत नहीं होगा कि – हाँ, महामृत्युंजय मंत्र से मौत पराजित नहीं तो कम से कम स्थगित जरूर हो सकती है।