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राजस्थान का अनोखा मंदिर जहां भगवान शिव के अंगूठे की होती है पूजा, वीडियो में रहस्यमयी पौराणिक कथा जान उड़ आप भी रह जाएंगे दंग 

 

श्रावण मास की शुरुआत को लेकर कई लोगों के मन में असमंजस की स्थिति है कि सावन 21 जुलाई से शुरू हो रहा है या 22 जुलाई से। आपको बता दें कि इस साल श्रावण मास 22 जुलाई 2024 को शुरू हो रहा है, जबकि श्रावण मास की पूर्णिमा 19 अगस्त 2024 को होगी। अब अगर 21 जुलाई की बात करें तो इस दिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा है। 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जा रहा है।

<a href=https://youtube.com/embed/LGzqgQk5ie0?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/LGzqgQk5ie0/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="पवित्र शिवरात्रि व्रत कथा | सुपरफास्ट शिवरात्रि व्रत कथा | Shivratri Vrat Katha" width="1250">

आइए जानते हैं इस अनोखे मंदिर के बारे में...
राजस्थान के अचलगढ़ किले में स्थित अचलेश्वर महादेव का मंदिर एक विशेष पूजा पद्धति के लिए जाना जाता है। यहां शिवलिंग की पूजा की जगह भोलेनाथ के अंगूठे की पूजा की जाती है। इस अनोखे मंदिर के गर्भगृह में अंगूठे के नीचे एक रहस्यमयी पातालकुंड है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अंगूठे पर किए गए अभिषेक का जल कहां जाता है, इसका रहस्य आज तक सुलझ नहीं पाया है। 

शिव के अंगूठे की पूजा
अचलेश्वर महादेव मंदिर माउंट आबू में भगवान शिव के 108 मंदिरों में से एक है, जो अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। माउंट आबू को पुराणों में अर्ध काशी भी कहा जाता है और अचलेश्वर मंदिर इस मान्यता को और भी खास बनाता है। अचलेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां शिवलिंग की पूजा नहीं होती, बल्कि भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव का यह अंगूठा माउंट आबू के पर्वत को स्थिर रखने में मदद करता है।

रंग बदलने वाला रहस्यमयी शिवलिंग
मंदिर का शिवलिंग एक अद्भुत रहस्य समेटे हुए है। यह दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। सुबह इसका रंग लाल होता है, दोपहर में केसरिया हो जाता है और रात होते ही काला हो जाता है। इस रहस्यमयी बदलाव को देखने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं।

भगवान शिव के पैरों के निशान
मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव के पैर के अंगूठे का निशान आज भी मौजूद है। ऐसा माना जाता है कि यह अंगूठा माउंट आबू के पर्वत को थामे हुए है। अगर यह निशान कभी मिट गया तो माउंट आबू का पहाड़ भी मिट जाएगा।

विशाल पंचधातु नंदी और प्राचीन कलाकृतियाँ
मंदिर में भव्य पंचधातु नंदी प्रतिमा स्थापित है, जिसका वजन चार टन है। अचलेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अद्भुत विशेषताओं और वास्तुकला के कारण यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है।