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राजस्थान का एक ऐसा चमत्कारी मंदिर जहाँ पूजा करने से हमेशा के लिए खत्म हो जाते है पति-पत्नी के झगड़े, वीडियो में जाने कहां स्थित है ये मंदिर 

 

राजस्थान में ऐसे कई मंदिर हैं। इनसे जुड़ी मान्यताएं इन्हें सबसे अलग बनाती हैं। ऐसा ही एक अनोखा चमत्कारी मंदिर सीकर और जयपुर की आखिरी सीमा पर स्थित पचार गांव में भगवान शिव के परिवार का मंदिर है। इस मंदिर को लेकर एक मान्यता है। अगर पति-पत्नी इस मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं तो उनकी जोड़ी कभी नहीं टूटती। वे हमेशा खुश रहते हैं। मंदिर के पुजारी महेश दयामा ने बताया कि इस मंदिर में भगवान शिव का पूरा परिवार विराजमान है।

<a href=https://youtube.com/embed/LGzqgQk5ie0?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/LGzqgQk5ie0/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="पवित्र शिवरात्रि व्रत कथा | सुपरफास्ट शिवरात्रि व्रत कथा | Shivratri Vrat Katha" width="1250">

इसके अलावा यहां भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग भी स्थापित किए गए हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार इस मंदिर को लेकर एक अनोखी मान्यता है कि अगर कोई नवविवाहित जोड़ा या पति-पत्नी यहां आकर हर सोमवार को भगवान भोलेनाथ का दूध से अभिषेक करते हैं तो उनकी जोड़ी कभी नहीं टूटती और उनके वैवाहिक जीवन में कभी खटास नहीं आती। इसलिए सोमवार को यहां विवाहित जोड़े जुटते हैं। द्वादशी ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध है यह मंदिर भगवान शिव के इस सदियों पुराने मंदिर में अलग-अलग जगहों से 12 ज्योतिर्लिंग भी स्थापित हैं। इसी वजह से इस मंदिर को अब द्वादशी ज्योतिर्लिंग मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। सोमवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है। सावन के महीने में इस मंदिर में कई धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। जहां पूरा गांव इस कार्यक्रम में हिस्सा लेता है।

कांच से बना है यह शिव मंदिर
भगवान भोलेनाथ के इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि यह पूरा मंदिर कांच से जड़ा हुआ है। चारों तरफ कांच से सुंदर आकृतियां बनी हुई हैं। भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग के साथ-साथ भक्त का चेहरा भी कांच में दिखाई देता है। रात के समय यह मंदिर बेहद मनोरम हो जाता है। भगवान शिव के शिवलिंग पर पड़ने वाली लाल रोशनी यहां आने वाले भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। यही वजह है कि गुजरात, दिल्ली और जयपुर समेत दूर-दूर से प्रवासी भी इस मंदिर में माथा टेकने आते हैं।