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क्या 2026 में फिर आएगी 150 पहले जैसा प्रलय और होगा महाविनाश, अल-नीनो को लेकर डर और दावे

 

हाल के दिनों में अल-नीनो को लेकर कई तरह की आशंकाएं और दावे सामने आ रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि यह 149 साल पहले जैसी बड़ी तबाही ला सकता है। हालांकि विशेषज्ञ इन दावों को पूरी तरह ऐतिहासिक तुलना के साथ जोड़कर देखने से बचने की सलाह देते हैं।

अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के सतही पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ता है, जिससे कई क्षेत्रों में बारिश कम या ज्यादा हो सकती है।

ऐतिहासिक दावे और वास्तविकता

कुछ रिपोर्ट्स में 19वीं सदी के एक “सुपर अल-नीनो” का जिक्र मिलता है, जिसे सूखा, अकाल और बड़ी मानवीय क्षति से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि उस समय भारत, अफ्रीका और ब्राजील जैसे क्षेत्रों में गंभीर सूखा पड़ा था। लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक शोध यह भी बताते हैं कि उस दौर के आंकड़े सीमित और अनुमानित हैं, इसलिए उन्हें आज के पैमानों से सीधे जोड़ना पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सटीक नहीं माना जाता।

2026 को लेकर क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

2026 में “बेहद शक्तिशाली अल-नीनो” आने के दावों पर मौसम वैज्ञानिकों की राय सावधानीपूर्ण है। वर्तमान में जलवायु मॉडल लगातार अपडेट होते रहते हैं और अल-नीनो की भविष्यवाणी आमतौर पर कुछ महीनों से एक साल पहले तक ही अधिक सटीक होती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल-नीनो हर बार एक जैसा प्रभाव नहीं डालता। इसका असर क्षेत्रीय परिस्थितियों, समुद्री तापमान और वायुमंडलीय पैटर्न पर निर्भर करता है।

भारत पर संभावित असर

अगर अल-नीनो मजबूत होता है तो भारत में मानसून कमजोर पड़ने, बारिश में असमानता और कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ सकती है। वहीं कुछ इलाकों में अचानक भारी बारिश और बाढ़ का खतरा भी रहता है।