क्या बिना पायलट के उड़ेंगे पैसेंजर प्लेन? जानिए ऑटोमैटिक विमानों से कितना बदलेगा आसमान का भविष्य
कल्पना कीजिए कि एक विमान आसमान में उड़ रहा हो, लेकिन उसके अंदर कोई पायलट न बैठा हो। यह अब सिर्फ कल्पना नहीं रह गई है। अमेरिका के कैलिफोर्निया की सैन जोकिन घाटी में ऐसे ही एक स्वायत्त विमान का इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक के छिड़काव के लिए किया जा रहा है। खास बात यह है कि विमान बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए फसल पर स्प्रे करता है और इसे जमीन से मौजूद टीम नियंत्रित व मॉनिटर करती है।
कम ऊंचाई पर उड़कर करता है फसलों पर स्प्रे
इस विमान को सैन फ्रांसिस्को स्थित स्टार्टअप पाइका ने तैयार किया है। कंपनी में फ्लाइट इंजीनियर रस्स मारोट्ज़के के मुताबिक, बिना पायलट वाला विमान सामान्य विमान की तुलना में ज्यादा कम ऊंचाई पर उड़ सकता है।
कम ऊंचाई पर उड़ने का फायदा यह है कि कीटनाशक के हवा में बहने यानी स्प्रे ड्रिफ्ट की संभावना कम हो जाती है। इससे फसल तक ज्यादा सटीक तरीके से दवा पहुंचाई जा सकती है और पारंपरिक हवाई छिड़काव की तुलना में कम केमिकल की जरूरत पड़ सकती है।
300 लीटर तक स्प्रे ले जा सकता है विमान
पाइका का फसल छिड़काव करने वाला विमान पूरी तरह इलेक्ट्रिक है। इसकी बैटरी विमान के अगले हिस्से में लगी होती है। यह करीब 35 मिनट तक उड़ान भर सकता है और इसके बीच में बने टैंक में लगभग 300 लीटर तक स्प्रे सामग्री ले जाने की क्षमता है।
इन विमानों को आम तौर पर बड़े ड्रोन भी कहा जाता है, लेकिन उनका आकार सामान्य ड्रोन से काफी बड़ा है। इनके पंखों का फैलाव करीब 11.5 मीटर है।
कंप्यूटर तय करता है विमान का पूरा रास्ता
विमान के उड़ान भरने से पहले इंजीनियर कंप्यूटर पर उस खेत का क्षेत्र तय करते हैं, जहां स्प्रे किया जाना है। इसके बाद सॉफ्टवेयर विमान के लिए पूरा उड़ान मार्ग तैयार करता है।
इस दौरान बिजली की लाइन, पेड़ और दूसरी संभावित बाधाओं को भी मैप में शामिल किया जाता है। विमान रनवे से उड़ान भरने के बाद तय रास्ते पर खुद उड़ता है और फसल के निर्धारित हिस्से में स्प्रे करता है।
बैटरी या स्प्रे खत्म होने के करीब विमान खुद रनवे पर लौटकर लैंड कर सकता है। इसके बाद बैटरी बदलने और जरूरी सामग्री भरने के बाद विमान दोबारा उड़ान भरता है और जिस जगह काम रोका गया था, वहीं से आगे काम शुरू कर सकता है।
ब्राजील में भी हो रहा इस्तेमाल
पाइका के करीब एक दर्जन विमान पहले से ही ब्राजील में मौजूद हैं। वहां इनका इस्तेमाल कपास और सोयाबीन जैसी फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए किया जा रहा है।
कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाना है। अभी कंपनी हर साल करीब दो दर्जन विमान बनाने की क्षमता रखती है, जिसे 2030 तक करीब 1,000 विमान सालाना करने का लक्ष्य रखा गया है। एक विमान की कीमत करीब 5.5 लाख डॉलर बताई गई है।
ऑटोपायलट और स्वायत्त विमान में क्या अंतर?
स्वायत्त विमान और ऑटोपायलट एक ही चीज नहीं हैं। ऑटोपायलट विमान को उड़ान के दौरान कुछ कार्यों में सहायता देता है, ठीक वैसे ही जैसे कार में क्रूज कंट्रोल या लेन-कीपिंग सिस्टम मदद करता है।
वहीं स्वायत्त विमान का लक्ष्य टेक-ऑफ से लेकर लैंडिंग तक पूरी उड़ान को सेंसर और सॉफ्टवेयर की मदद से संभालना है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप को काफी कम किया जाता है।
सिर्फ खेती नहीं, माल ढुलाई में भी इस्तेमाल की तैयारी
स्वायत्त विमान तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन की विंडरेसर जैसी कंपनियां ऐसे विमानों का इस्तेमाल दूरदराज के इलाकों में सामान पहुंचाने के लिए करने की तैयारी कर रही हैं।
कंपनी शेटलैंड और ऑर्कनी जैसे इलाकों में स्वायत्त कार्गो सेवा शुरू करने की अनुमति मांग रही है। इसका मकसद उन जगहों तक सामान पहुंचाना है, जहां सामान्य परिवहन व्यवस्था मुश्किल या महंगी हो सकती है।
बड़ी कंपनियां भी ऑटोनॉमस फ्लाइट पर कर रही हैं काम
कुछ कंपनियां बिल्कुल नए स्वायत्त विमान बना रही हैं, जबकि दूसरी कंपनियां मौजूदा विमानों में स्वायत्त तकनीक जोड़ रही हैं।
अमेरिका की रिलायबल रोबोटिक्स मौजूदा सेसना 208बी ग्रैंड कारवां विमान पर अपनी तकनीक का परीक्षण कर रही है। दूसरी ओर मर्लिन लैब्स बड़े सैन्य विमानों में स्वायत्त उड़ान प्रणाली को लागू करने पर काम कर रही है।
इन कंपनियों की तकनीक में रडार, कैमरा, सेंसर और लिडार जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि विमान दूसरे विमानों, पेड़ों, वाहनों, पक्षियों और अन्य बाधाओं को पहचान सके।
क्या भविष्य में बिना पायलट उड़ेंगे यात्री विमान?
यही इस तकनीक का सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल पूरी तरह स्वायत्त यात्री विमानन अभी काफी दूर माना जाता है। यात्री विमान में सुरक्षा मानक बेहद सख्त होते हैं और छोटी सी गलती भी गंभीर परिणाम दे सकती है।
फिर भी टेक्नोलॉजी कंपनियों का मानना है कि स्वायत्त विमान धीरे-धीरे कृषि, कार्गो और दूसरे विशेष क्षेत्रों से होते हुए कमर्शियल एविएशन तक पहुंच सकते हैं।
भविष्य में संभव है कि विमानों में स्वायत्त सिस्टम पायलट की जगह लेने के बजाय पायलट की मदद करने वाली तकनीक के रूप में ज्यादा इस्तेमाल हों। इससे उड़ान की निगरानी, बाधाओं की पहचान और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने की क्षमता बेहतर हो सकती है।