‘गॉडजिला अल नीनो’ की दस्तक से बढ़ी चिंता, क्या सूखा, गर्मी और बिजली संकट की चपेट में आएगा भारत? जाने कितना खतरनाक
अल नीनो की वापसी भारत के लिए नई चुनौतियां ला सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो के असर से 2026 में मॉनसून कमजोर हो सकता है, जिससे खेती, खाने-पीने की चीजों की कीमतें, बिजली की मांग और देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। सरकार और मौसम विभाग स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।
अल नीनो क्या है?
अल नीनो एक मौसमी घटना है जिससे प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज़्यादा हो जाता है। यह दुनिया भर में मौसम के पैटर्न को प्रभावित करता है। भारत में, अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर मॉनसून, कम बारिश और बढ़ते तापमान से होता है। ग्लोबल मौसम एजेंसियों ने 2026 में इसके बनने की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की है।
मॉनसून पर संभावित बड़ा असर
भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि 2026 का मॉनसून सामान्य से कमजोर हो सकता है। बारिश औसत का 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 11 सालों में सबसे कम स्तर हो सकता है। इससे खरीफ की फसल की बुवाई पर खतरा पैदा हो सकता है।
किसानों के लिए बढ़ती चिंता
भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है। कमजोर मॉनसून से धान, मक्का, दालों और तिलहन जैसी फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है। हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया गया है कि अल नीनो वाले सालों में कई जिलों में खरीफ की पैदावार में लगभग 10 प्रतिशत की कमी आई है।
महंगाई बढ़ने का खतरा
अगर बारिश कम होती है, तो खेती से होने वाली पैदावार गिर सकती है, जिसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सब्जियों, अनाज और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक भी कमजोर मॉनसून को महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम मानता है।
बिजली की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अल नीनो की स्थितियों के कारण अक्सर तापमान बढ़ता है और गर्मियां लंबी होती हैं। इससे एयर कंडीशनर, कूलर और दूसरे बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है, जिससे पावर ग्रिड पर बोझ बढ़ेगा।
पानी के संकट का खतरा
कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक ही सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी का स्तर कम हो सकता है और कई शहरों व ग्रामीण इलाकों में पानी का संकट गहरा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा होगी। केंद्र सरकार ने अल नीनो के असर से प्रभावित हो सकने वाले 197 जिलों की पहचान की है और खेती व जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।
अल नीनो की वापसी भारत के लिए नई चुनौतियां ला सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो के असर से 2026 में मॉनसून कमजोर हो सकता है, जिससे खेती, खाने-पीने की चीजों की कीमतें, बिजली की मांग और देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। सरकार और मौसम विभाग स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।
अल नीनो क्या है?
अल नीनो एक मौसमी घटना है जिससे प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज़्यादा हो जाता है। यह दुनिया भर में मौसम के पैटर्न को प्रभावित करता है। भारत में, अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर मॉनसून, कम बारिश और बढ़ते तापमान से होता है। ग्लोबल मौसम एजेंसियों ने 2026 में इसके बनने की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की है।
मॉनसून पर संभावित बड़ा असर
भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि 2026 का मॉनसून सामान्य से कमजोर हो सकता है। बारिश औसत का 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 11 सालों में सबसे कम स्तर हो सकता है। इससे खरीफ की फसल की बुवाई पर खतरा पैदा हो सकता है।
किसानों के लिए बढ़ती चिंता
भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है। कमजोर मॉनसून से धान, मक्का, दालों और तिलहन जैसी फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है। हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया गया है कि अल नीनो वाले सालों में कई जिलों में खरीफ की पैदावार में लगभग 10 प्रतिशत की कमी आई है।
महंगाई बढ़ने का खतरा
अगर बारिश कम होती है, तो खेती से होने वाली पैदावार गिर सकती है, जिसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सब्जियों, अनाज और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक भी कमजोर मॉनसून को महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम मानता है।
बिजली की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अल नीनो की स्थितियों के कारण अक्सर तापमान बढ़ता है और गर्मियां लंबी होती हैं। इससे एयर कंडीशनर, कूलर और दूसरे बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है, जिससे पावर ग्रिड पर बोझ बढ़ेगा।
पानी के संकट का खतरा
कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक ही सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी का स्तर कम हो सकता है और कई शहरों व ग्रामीण इलाकों में पानी का संकट गहरा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा होगी। केंद्र सरकार ने अल नीनो के असर से प्रभावित हो सकने वाले 197 जिलों की पहचान की है और खेती व जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।