×

चीन की लैब से फैला था कोरोना वायरस? कोविड के बढ़ते मामलों के बीच 'वुहान लीक' थ्योरी पर सामने आई नई रिसर्च

 

कोरोना महामारी, जिसने पांच साल पहले दुनिया को हिला दिया था, एक बार फिर लौटती दिख रही है। भारत की राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों में कोविड-19 के नए मामले सामने आए हैं। न केवल भारत, बल्कि पाकिस्तान, चीन, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में भी कोरोना संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। इस नई लहर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और सरकारों को सतर्क कर दिया है।

लैब लीक थ्योरी पर नया शोध

इस बीच एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर वर्षों से चल रही बहस पर बड़ा खुलासा किया है। यह शोध ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुआ, जिसमें अमेरिका, यूरोप और एशिया के 20 वैज्ञानिक संस्थानों ने भाग लिया। इस रिसर्च में 167 चमगादड़ों में पाए गए कोरोना वायरस के जीनोम का विश्लेषण किया गया और इसके नतीजे चौंकाने वाले हैं। शोध के मुताबिक, कोविड-19 का वायरस SARS-CoV-2 वुहान की लैब में तैयार नहीं हुआ था, बल्कि यह दक्षिण पूर्व एशिया में चमगादड़ों की आबादी में स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ। इसके बाद यह अवैध वन्यजीव व्यापार के ज़रिए मनुष्यों के संपर्क में आया और फिर महामारी का रूप ले लिया।

वुहान लैब से नहीं फैला वायरस

इस रिसर्च ने उस ‘लैब लीक थ्योरी’ को नकार दिया है, जिसका समर्थन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई बड़े नेताओं और संगठनों ने किया था। रिसर्च के प्रमुख लेखक जोनाथन पेकर ने बताया कि “SARS-CoV-2 का सबसे करीबी वायरस लाओस और चीन के युन्नान प्रांत में पाए गए हैं, जो वुहान से 2700 किलोमीटर दूर हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वायरस की उत्पत्ति का वुहान लैब से कोई लेना-देना नहीं है।” वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि यह वायरस संभवतः 2012 से 2014 के बीच चमगादड़ों में मौजूद था और 2019 में यह पहली बार इंसानों में सामने आया

वन्यजीव व्यापार से संक्रमण

एरिजोना विश्वविद्यालय के जीवविज्ञानी माइकल वोरोबे ने बताया कि यह घटना कोई नई नहीं है। “SARS-CoV-1 वायरस भी इसी तरह पाम सिवेट और रेकून कुत्तों के जरिए फैला था। इस बार भी वन्यजीवों के ज़रिए वायरस इंसानी बस्तियों तक पहुंचा और वहां से महामारी फैल गई।” उन्होंने बताया कि यह प्राकृतिक संक्रमण का हिस्सा नहीं बल्कि वन्यजीवों के अवैध व्यापार नेटवर्क के माध्यम से हुआ फैलाव था।

सतर्कता जरूरी

दुनिया एक बार फिर कोरोना के संभावित खतरे की ओर बढ़ रही है। दिल्ली और अन्य राज्यों में नए मामले सामने आने के बाद सरकारें स्वास्थ्य प्रणाली को सक्रिय करने में जुट गई हैं। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और टीकाकरण पर एक बार फिर ज़ोर दिया जा रहा है। नई रिसर्च से यह स्पष्ट हो गया है कि कोरोना वायरस का स्रोत प्राकृतिक था, लेकिन इंसानी गतिविधियों ने इसे महामारी में बदल दिया। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो गया है कि वन्यजीव व्यापार पर सख्ती, स्वास्थ्य जागरूकता और वैज्ञानिक शोधों के निष्कर्षों को गंभीरता से लिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे संकटों से बचा जा सके।