अंतरिक्ष से आया रहस्यमयी रेडियो सिग्नल, क्या एलियंस ने भेजा है मैसेज? वैज्ञानिकों ने बताया सच
रात के समय जब हम आसमान की तरफ देखते हैं तो अक्सर मन में यह सवाल आता है कि क्या इस विशाल ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा कहीं और भी जीवन मौजूद है? अब अंतरिक्ष से सामने आई एक नई वैज्ञानिक खोज ने इस सवाल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।वैज्ञानिकों ने हमारे सौरमंडल से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद एक एक्सोप्लैनेट से आने वाली रेडियो तरंगों को डिटेक्ट किया है। इस खोज के बाद सोशल मीडिया पर एलियंस और दूसरे ग्रहों पर जीवन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि इन सिग्नल्स को एलियंस का संदेश मानने की कोई वजह नहीं है।
तो आखिर ये रेडियो सिग्नल कहां से आ रहे हैं और इनके पीछे की असली वजह क्या है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
सौरमंडल से बाहर मौजूद है यह विशाल ग्रह
जिस ग्रह से रेडियो सिग्नल डिटेक्ट किए गए हैं, उसका नाम Beta Pictoris b है। यह ग्रह पृथ्वी से लगभग 63 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है और अपने होस्ट स्टार Beta Pictoris के चक्कर लगाता है।
यह एक बेहद विशाल ग्रह है। उपलब्ध वैज्ञानिक अनुमानों के मुताबिक इसका द्रव्यमान बृहस्पति से कई गुना अधिक है। इसकी खोज करीब वर्ष 2008 में की गई थी और यह अपने तारे की परिक्रमा लगभग 23.6 साल में पूरी करता है।
क्या सच में एलियंस भेज रहे हैं सिग्नल?
रेडियो सिग्नल का नाम सुनते ही सबसे पहले एलियंस का ख्याल आना स्वाभाविक है। लेकिन फिलहाल वैज्ञानिकों के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है कि Beta Pictoris b से किसी दूसरी सभ्यता ने पृथ्वी की ओर संदेश भेजा है।
दरअसल, वैज्ञानिकों के मुताबिक इन रेडियो तरंगों के पीछे एक प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है। इस ग्रह का मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और उसके आसपास मौजूद ऊर्जावान कण आपस में संपर्क करते हैं, जिससे रेडियो उत्सर्जन पैदा हो सकता है।
ग्रह पर बन सकता है विशाल Aurora
पृथ्वी पर आपने Northern Lights यानी Aurora के बारे में जरूर सुना होगा। जब सूर्य से आने वाले ऊर्जावान कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, तो आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देती है।
Beta Pictoris b पर भी इसी तरह की प्रक्रिया होने के संकेत मिले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह के मजबूत मैग्नेटिक फील्ड और आसपास के वातावरण में मौजूद ऊर्जावान कणों की वजह से रेडियो तरंगें पैदा हो सकती हैं।
यानी जो सिग्नल वैज्ञानिकों ने पकड़े हैं, उन्हें फिलहाल किसी एलियन संदेश के बजाय ग्रह की प्राकृतिक चुंबकीय गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
बेहद तेजी से घूमता है Beta Pictoris b
इस ग्रह की एक और खासियत इसकी तेज रोटेशन स्पीड है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार Beta Pictoris b अपनी धुरी पर लगभग 8 से 9 घंटे में एक चक्कर पूरा कर सकता है। तुलना करें तो पृथ्वी को एक रोटेशन पूरा करने में करीब 24 घंटे लगते हैं।
इतने बड़े ग्रह का इतनी तेजी से घूमना और उसका मजबूत चुंबकीय क्षेत्र इसे वैज्ञानिकों के लिए बेहद दिलचस्प बनाता है। इसी वजह से इस ग्रह से निकलने वाले रेडियो उत्सर्जन का अध्ययन किया जा रहा है।
MeerKAT टेलीस्कोप ने खोज को बनाया खास
इस खोज में दक्षिण अफ्रीका में मौजूद MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप एरे की अहम भूमिका रही। वैज्ञानिकों ने रेडियो डेटा का अध्ययन करके यह समझने की कोशिश की कि सिग्नल वास्तव में पूरे स्टार सिस्टम से आ रहे हैं या किसी खास ग्रह से जुड़े हुए हैं।
इस तरह के रेडियो ऑब्जर्वेशन वैज्ञानिकों को दूर स्थित ग्रहों के चुंबकीय क्षेत्र और उनके वातावरण के बारे में नई जानकारी हासिल करने में मदद कर सकते हैं।
मजबूत मैग्नेटिक फील्ड का मिला संकेत
इस खोज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इससे वैज्ञानिकों को Beta Pictoris b के मैग्नेटिक फील्ड के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। ग्रहों का चुंबकीय क्षेत्र उनके आसपास के वातावरण और अंतरिक्ष से आने वाले ऊर्जावान कणों के साथ उनकी बातचीत को समझने में अहम भूमिका निभाता है।
हालांकि, किसी ग्रह पर मजबूत मैग्नेटिक फील्ड का होना अपने आप में वहां जीवन मौजूद होने का सबूत नहीं है। जीवन की संभावना समझने के लिए ग्रह का तापमान, वातावरण, रासायनिक संरचना, पानी की उपलब्धता और कई अन्य परिस्थितियों का अध्ययन करना पड़ता है।
फिलहाल Beta Pictoris b से मिले रेडियो सिग्नल एलियंस के संदेश से ज्यादा एक प्राकृतिक खगोलीय घटना को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संकेत हैं। इस तरह की खोजें वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती हैं कि हमारे सौरमंडल से बाहर मौजूद विशाल ग्रहों का चुंबकीय वातावरण किस तरह काम करता है।