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ISRO का बड़ा कमबैक, EOS-05 की सफल लॉन्चिंग से अंतरिक्ष में बढ़ी भारत की ‘नजर’, जानें क्यों खास है मिशन
 

 


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. 4 सितंबर 2026 की सुबह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट ने EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. रॉकेट ने सुबह 2:55 बजे उड़ान भरी और उपग्रह को उसकी निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया. ISRO के मुताबिक EOS-05 भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है. 

यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 2021 में EOS-03 मिशन क्रायोजेनिक स्टेज में आई समस्या के कारण सफल नहीं हो पाया था. ऐसे में EOS-05 की सफलता को ISRO के लिए महत्वपूर्ण वापसी के तौर पर देखा जा रहा है. 

36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से होगी लगातार निगरानी

EOS-05 की सबसे बड़ी खासियत इसकी ऑर्बिट है. आमतौर पर कई अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लो-अर्थ ऑर्बिट में रहते हैं और किसी इलाके के ऊपर से गुजरते समय उसकी तस्वीरें लेते हैं. इसके मुकाबले EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत और आसपास के क्षेत्रों की लगातार निगरानी के लिए तैयार किया गया है.

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में पहुंचने के बाद यह करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से एक बड़े क्षेत्र पर लगातार नजर रखने की क्षमता देगा. इससे बड़े इलाके की बार-बार और तेज इमेजिंग संभव हो सकेगी. 

आपदा के समय तेजी से मिलेगी जानकारी

EOS-05 का इस्तेमाल सिर्फ तस्वीरें लेने के लिए नहीं होगा. इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी भी है. चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग और मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाओं के दौरान लगातार उपलब्ध होने वाली इमेजरी से संबंधित एजेंसियों को हालात समझने और प्रतिक्रिया की योजना बनाने में मदद मिल सकती है.

इस तरह का सिस्टम खास तौर पर उन घटनाओं में उपयोगी हो सकता है, जहां स्थिति तेजी से बदलती है और बार-बार अपडेट की जरूरत होती है.

कृषि और पर्यावरण की निगरानी में भी मदद

EOS-05 से मिलने वाले एडवांस इमेजिंग डेटा का इस्तेमाल कृषि, जल संसाधन, वानिकी और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है. अलग-अलग स्पेक्ट्रल बैंड में मिलने वाली जानकारी से जमीन और वनस्पति की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है.

यानी यह सैटेलाइट केवल अंतरिक्ष से तस्वीरें भेजने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके डेटा का इस्तेमाल कई नागरिक और रणनीतिक क्षेत्रों में किया जा सकता है.

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से लगातार निगरानी की क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. भारत के बड़े भूभाग और रणनीतिक क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के लिए ऐसी अंतरिक्ष आधारित क्षमता उपयोगी हो सकती है.

विशेष रूप से सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों की व्यापक निगरानी के लिए हाई-रिजॉल्यूशन अर्थ इमेजिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. हालांकि, EOS-05 को व्यापक अर्थ-पर्यवेक्षण उद्देश्यों वाला सैटेलाइट बताया गया है, इसलिए इसके इस्तेमाल को केवल सैन्य निगरानी तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए. 

GSLV की 19वीं उड़ान हुई सफल

EOS-05 को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाला GSLV-F17, भारत के GSLV कार्यक्रम की 19वीं उड़ान है. ISRO के अनुसार इस मिशन में रॉकेट ने EOS-05 को सफलतापूर्वक Sub-GTO में स्थापित किया. इसके बाद उपग्रह को अपनी अंतिम जियोसिंक्रोनस कक्षा तक पहुंचाने के लिए आगे की कक्षीय प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं. 

EOS-05 का वजन करीब 2,367 किलोग्राम बताया गया है, जबकि GSLV Mk II की ऊंचाई लगभग 51.7 मीटर है. 

2021 की नाकामी के बाद बड़ी सफलता

EOS-05 मिशन की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि यह 2021 में असफल हुए EOS-03/GISAT-1 मिशन की जगह विकसित किया गया है. उस समय GSLV-F10 के क्रायोजेनिक चरण में आई तकनीकी समस्या के कारण उपग्रह निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सका था.

अब GSLV-F17 के सफल प्रदर्शन के साथ ISRO ने न केवल एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाया है, बल्कि जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग के क्षेत्र में भी एक नई क्षमता हासिल की है. 

भारत की अंतरिक्ष निगरानी क्षमता को मिलेगा नया विस्तार

EOS-05 भारत के लिए एक ऐसा ‘आसमान का कैमरा’ साबित हो सकता है, जो बड़े भूभाग की लगातार निगरानी में मदद करेगा. आपदा प्रबंधन से लेकर कृषि, पर्यावरण और रणनीतिक निगरानी तक इसके डेटा के कई संभावित उपयोग हैं.

ISRO के लिए यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में जनवरी के PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के बाद यह अगला प्रमुख लॉन्च रहा. EOS-05 की सफल लॉन्चिंग ने भारत के अर्थ ऑब्जर्वेशन और जियोसिंक्रोनस इमेजिंग कार्यक्रम को एक नई दिशा दी है.