हवाई के बंजर जंगलों को मिला नया जीवन! 20 साल पहले बोए थे 1.5 लाख पौधे, अब बदला पूरा इकोसिस्टम
अमेरिका के हवाई द्वीप में कभी हजारों एकड़ जमीन जंगल से बदलकर घास के मैदान में तब्दील हो गई थी। इससे न सिर्फ वहां का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा, बल्कि कई दुर्लभ पक्षियों के सामने भी रहने और घोंसला बनाने का संकट खड़ा हो गया। इसके बाद पर्यावरण संरक्षणकर्ताओं ने इस इलाके को दोबारा जंगल में बदलने की कोशिश शुरू की, जिसका नतीजा करीब दो दशक बाद देखने को मिला।
1992 में शुरू हुआ जंगल बसाने का अभियान
हवाई के बिग आइलैंड पर स्थित हकालाऊ फॉरेस्ट वाइल्डलाइफ रिफ्यूज के आसपास बड़ी मात्रा में जमीन घास के मैदान में बदल चुकी थी। 1990 के दशक में संरक्षणकर्ताओं ने इस जमीन पर दोबारा जंगल खड़ा करने का फैसला लिया।
साल 1992 में यहां पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया गया। अगले करीब पांच वर्षों में अमेरिकन फॉरेस्ट्स ने घास के मैदानों में 1,50,650 देसी कोआ पेड़ लगाए। इसका मकसद केवल हरियाली बढ़ाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा प्राकृतिक आवास तैयार करना था, जहां हवाई के दुर्लभ और स्थानीय पक्षी फिर से रह सकें और अपना घोंसला बना सकें।
कोआ पेड़ों ने बदली इलाके की तस्वीर
कोआ हवाई का मूल निवासी पेड़ है और वहां के जंगलों के लिए इसे महत्वपूर्ण प्रजाति माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह अपेक्षाकृत खराब जमीन पर भी अच्छी तरह विकसित हो सकता है। यही वजह थी कि जंगल बहाली के इस बड़े अभियान में कोआ के पेड़ों को प्राथमिकता दी गई।
समय के साथ लगाए गए पेड़ बड़े होने लगे और घास के मैदान धीरे-धीरे दोबारा जंगल का रूप लेने लगे।
20 साल बाद सामने आया बड़ा बदलाव
करीब दो दशकों से ज्यादा समय तक किए गए अध्ययन और निरीक्षण में शोधकर्ताओं को पता चला कि दोबारा तैयार किए गए जंगल में पक्षियों की वापसी शुरू हो चुकी थी। पेड़ों के बढ़ने के साथ-साथ अलग-अलग पक्षी प्रजातियां इस इलाके में पहुंचने लगीं।
यह परियोजना हवाई में चलाए गए बड़े जंगल बहाली प्रयासों में शामिल है। इसके नतीजों से यह संकेत मिला कि अगर सही प्रजातियों के पेड़ लगाकर लंबे समय तक उनकी देखभाल की जाए, तो नष्ट हो चुके प्राकृतिक आवास को काफी हद तक दोबारा तैयार किया जा सकता है।
दुर्लभ अकियापोलाऊ भी जंगल में दिखा
इस परियोजना की सबसे खास बात यह रही कि हवाई में खतरे की श्रेणी में रखे गए अकियापोलाऊ पक्षी को भी दोबारा बनाए गए जंगल में देखा गया। अध्ययन के दौरान इसकी संख्या में बढ़ोतरी के संकेत भी मिले।
हवाई के कई पक्षी दुनिया में कहीं और नहीं पाए जाते। ऐसे में उनके प्राकृतिक जंगलों का खत्म होना उनके अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है। हकालाऊ प्रोजेक्ट के नतीजे बताते हैं कि जंगलों को दोबारा बहाल करने से इन दुर्लभ प्रजातियों के लिए जरूरी आवास वापस बनाया जा सकता है।
हर पक्षी ने एक जैसी तेजी से नहीं की वापसी
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि सभी पक्षी प्रजातियों ने नए जंगल पर एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं दी। कुछ प्रजातियां पेड़ों के बढ़ने के साथ अपेक्षाकृत जल्दी वापस आ गईं, जबकि कुछ को नए आवास को अपनाने में ज्यादा समय लगा।
यह अध्ययन इस बात का उदाहरण है कि जंगल बहाली का असर तुरंत दिखाई नहीं देता। लेकिन लंबे समय तक लगातार संरक्षण और निगरानी की जाए तो खोए हुए प्राकृतिक आवास में फिर से जैव विविधता लौट सकती है।