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300 बाइसन से हजारों का झुंड! अमेरिका में जानवरों ने बचाई संकटग्रस्त प्रेयरी, 30 साल में बदल गई प्रकृति की तस्वीर

 

दुनियाभर में पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के ओक्लाहोमा से एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जो बताती है कि वन्यजीव प्रकृति को दोबारा संतुलित करने में कितनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। यहां करीब तीन दशक पहले 300 अमेरिकन बाइसन को घास के मैदानों में छोड़ा गया था। आज इनकी संख्या हजारों में पहुंच चुकी है और इनकी मौजूदगी ने एक संकटग्रस्त प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।यह संरक्षण अभियान वर्ष 1993 में शुरू हुआ था, जब पशुपालक केनेथ और डायना एडम्स ने द नेचर कंजर्वेंसी को 300 अमेरिकन बाइसन दान किए थे। इन जानवरों को ओक्लाहोमा के विशाल घास के मैदानों में छोड़ा गया। उस समय इसका उद्देश्य केवल बाइसन की आबादी बढ़ाना नहीं था, बल्कि उत्तरी अमेरिका के तेजी से खत्म हो रहे प्राकृतिक घास के मैदानों को बचाना भी था।तीन दशक बाद इस प्रयास के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। बाइसन का झुंड अब हजारों में पहुंच चुका है और इनकी चराई, मिट्टी पर गतिविधियों तथा प्राकृतिक प्रक्रियाओं ने घास के मैदानों के संतुलन को बनाए रखने में मदद की है।

300 बाइसन से हजारों तक पहुंची आबादी

ओक्लाहोमा के पॉहस्का के पास स्थित जोसेफ एच. विलियम्स टॉलग्रास प्रेयरी प्रिजर्व में बाइसन का यह झुंड घूमता है। यह संरक्षित क्षेत्र करीब 39,650 एकड़ में फैला हुआ है और उत्तरी अमेरिका के बचे हुए प्राकृतिक टॉलग्रास प्रेयरी क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।वर्ष 1993 की शरद ऋतु में केन-एडा रेंच से लाए गए 300 बाइसन इस संरक्षण अभियान की शुरुआत बने थे। समय के साथ इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गर्मियों के मौसम में यहां बाइसन की आबादी लगभग 2,700 तक पहुंच जाती है।इन बाइसन के झुंड को दानदाता परिवार की बेटी के नाम पर क्रिस्टीना एडम्स बाइसन हर्ड नाम दिया गया है। आज यह झुंड संरक्षित क्षेत्र की प्रमुख पहचान बन चुका है।

बाइसन कैसे बचा रहे हैं घास के मैदान?

बाइसन केवल घास खाने वाले बड़े जानवर नहीं हैं। वे अपने खान-पान और घूमने-फिरने के तरीके से पूरे पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करते हैं। उनकी मौजूदगी घास के मैदानों में प्राकृतिक विविधता बनाए रखने में मदद करती है।

1. घास और पौधों के विकास में मदद

बाइसन मुख्य रूप से घास चरते हैं। इससे कुछ पौधों का अत्यधिक फैलाव सीमित होता है और दूसरी वनस्पतियों को बढ़ने के लिए जगह मिलती है। इस प्रक्रिया से घास के मैदानों में विभिन्न प्रकार के पौधों को पनपने का अवसर मिलता है।

2. मिट्टी में पोषक तत्वों का वितरण

जब बाइसन अलग-अलग क्षेत्रों में घूमते हैं, तो उनके गोबर के माध्यम से पोषक तत्व मिट्टी में वापस पहुंचते हैं। इससे प्राकृतिक पोषक चक्र को बनाए रखने में मदद मिलती है।

3. जमीन पर बनाते हैं छोटे गड्ढे

बाइसन मिट्टी में लोटते हैं और अपनी गतिविधियों से जमीन की सतह को प्रभावित करते हैं। इससे छोटे गड्ढे बन सकते हैं, जो घास के मैदानों की संरचना और कुछ अन्य प्राकृतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।

4. दूसरे जीवों के लिए अनुकूल वातावरण

बाइसन की चराई से वनस्पतियों की बनावट और ऊंचाई में बदलाव आता है। इससे अलग-अलग प्रकार के वन्यजीवों को भोजन, आश्रय और रहने के लिए उपयुक्त स्थान मिल सकते हैं।

टॉलग्रास प्रेयरी का 4 फीसदी से भी कम हिस्सा बचा

टॉलग्रास प्रेयरी कभी उत्तरी अमेरिका के विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी। यह टेक्सास से मिनेसोटा तक अमेरिका के कई राज्यों और कनाडा के कुछ हिस्सों में मौजूद थी। लेकिन कृषि के विस्तार और शहरी विकास के कारण इसके प्राकृतिक आवास का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया।अब इस मूल पारिस्थितिक तंत्र का 4 फीसदी से भी कम हिस्सा बचा है। बचे हुए प्रमुख क्षेत्रों में ओक्लाहोमा और कंसास के हिस्से शामिल हैं। ऐसे में जोसेफ एच. विलियम्स टॉलग्रास प्रेयरी प्रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।यहां बाइसन की वापसी ने प्राकृतिक घास के मैदानों की एक महत्वपूर्ण विशेषता को फिर से मजबूत करने में योगदान दिया है। इसके साथ ही क्षेत्र की देशी वनस्पतियों और वन्यजीवों के आवास को सुरक्षित रखने में भी मदद मिली है।

700 से ज्यादा पौधों और सैकड़ों पक्षियों का आश्रय

द नेचर कंजर्वेंसी के अनुसार, यह संरक्षित क्षेत्र 700 से अधिक पौधों की प्रजातियों, 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों और 80 स्तनधारी प्रजातियों को आश्रय प्रदान करता है।यहां के घास के मैदान वन्यजीवों को भोजन, सुरक्षा और प्रजनन के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराते हैं। इसलिए इस क्षेत्र को बचाने का मतलब केवल बाइसन की रक्षा करना नहीं है, बल्कि यहां मौजूद कई अन्य प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवास को भी संरक्षित करना है।

बाइसन की सेहत पर भी रखी जाती है नजर

इस बड़े झुंड को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हर साल शरद ऋतु में संरक्षण क्षेत्र के कर्मचारी और स्थानीय पशुपालक बाइसन को एकत्र करते हैं। इस दौरान उनके स्वास्थ्य की जांच की जाती है, वजन लिया जाता है और जरूरत के अनुसार टीके लगाए जाते हैं।बाइसन की पहचान और निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक ईयर टैग ट्रांसपोंडर का इस्तेमाल भी किया जाता है। इनके जरिए जानवरों की उम्र, वजन, स्वास्थ्य और प्रजनन से जुड़ी जानकारी दर्ज करने में मदद मिलती है।इस तरह संरक्षण अभियान में केवल जानवरों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना ही शामिल नहीं है, बल्कि उनकी लगातार निगरानी और पूरे पारिस्थितिक तंत्र के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाता है।

प्रकृति को बचाने के लिए क्यों अहम है यह प्रयोग?

ओक्लाहोमा की यह मिसाल दिखाती है कि किसी क्षेत्र की मूल प्रजातियों को वापस लाना प्राकृतिक पर्यावरण को बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। बाइसन की चराई, उनकी गतिविधियां और पोषक तत्वों का प्राकृतिक चक्र घास के मैदानों को विविध बनाए रखने में योगदान देते हैं।हालांकि, केवल बाइसन की आबादी बढ़ाना ही पूरे पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है। प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, नियंत्रित आग के जरिए घास के मैदानों का प्रबंधन और वन्यजीवों की नियमित निगरानी भी जरूरी है।

करीब 30 साल पहले 300 बाइसन से शुरू हुआ यह अभियान आज हजारों जानवरों और समृद्ध जैव विविधता वाले संरक्षित क्षेत्र की कहानी बन चुका है। यह उदाहरण बताता है कि सही संरक्षण योजना और प्राकृतिक प्रक्रियाओं को जगह देकर इंसान बिगड़ते पर्यावरण को सुधारने में अहम भूमिका निभा सकता है।