समुद्र के पेट से निकला 16 टन चांदी का खजाना! 82 साल पुराने डूबे जहाज का सच जानकर हैरान रह जाएंगे आप
कल्पना कीजिए, समुद्र की गहराई में एक ऐसा जहाज पड़ा हो, जिसके साथ लाखों चांदी के सिक्के भी दफन हो गए हों। करीब 50 साल तक समुद्र की तलहटी में पड़े रहने के बाद जब इस जहाज का मलबा खोजा गया, तो वहां से लाखों चांदी के सिक्के बरामद हुए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पूरा खजाना आज तक सामने नहीं आ सका।
यह कहानी है अमेरिकी जहाज SS John Barry की, जो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सऊदी अरब के लिए लाखों चांदी के सिक्के लेकर जा रहा था।
1944 में अरब सागर में डूबा जहाज
साल 1944 में SS John Barry सऊदी अरब के लिए खास तौर पर तैयार किए गए चांदी के रियाल लेकर जा रहा था। इन सिक्कों को अमेरिका के फिलाडेल्फिया में ढाला गया था।
उस समय सऊदी अरब में तेल उद्योग तेजी से विकसित हो रहा था और बड़ी संख्या में मजदूर वहां काम कर रहे थे। इन मजदूरों को भुगतान करने के लिए बड़ी मात्रा में मुद्रा की जरूरत थी। इसी उद्देश्य से इन सिक्कों को सऊदी अरब भेजा जा रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कार्गो को इतना गोपनीय रखा गया था कि जहाज के क्रू के कई सदस्यों को भी इसके बारे में जानकारी नहीं थी।
लेकिन नवंबर 1944 में जहाज पर एक जर्मन पनडुब्बी ने टॉरपीडो से हमला कर दिया। हमले के बाद SS John Barry अरब सागर में डूब गया।
जहाज पर मौजूद 70 क्रू सदस्यों में से 68 को बचा लिया गया, जबकि दो लोगों की जान चली गई।
समुद्र की गहराई में छिपा था चांदी का खजाना
जहाज के डूबने के बाद उसका मलबा करीब पांच दशक तक समुद्र की गहराई में पड़ा रहा।
साल 1994 में आखिरकार इस मलबे तक पहुंचने के लिए एक बड़ा रिकवरी ऑपरेशन शुरू किया गया। इसके लिए मॉडिफाइड ड्रिलिंग शिप और समुद्र की तलहटी तक पहुंचने वाले विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।
मलबा करीब एक मील गहरे पानी में था। अक्टूबर 1994 में ऑपरेशन शुरू हुआ और नवंबर की शुरुआत में बचाव दल को पहली बार चांदी के सिक्के दिखाई दिए।
इसके बाद कुछ ही दिनों में 10 लाख से ज्यादा सऊदी रियाल के चांदी के सिक्के समुद्र से बाहर निकाले गए। अलग-अलग रिकॉर्ड में बरामद सिक्कों की संख्या करीब 13 से 14 लाख बताई गई है और इनका वजन लगभग 16 से 17 टन तक बताया गया।
लेकिन पूरा खजाना आज भी समुद्र में!
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहाज पर करीब 30 लाख एक-रियाल के सिक्के होने का रिकॉर्ड मिलता है। इसका मतलब यह हुआ कि 1994 के अभियान में इनका केवल एक हिस्सा ही बरामद किया जा सका।
रिकवरी ऑपरेशन जहाज के मलबे और कार्गो होल्ड के कुछ हिस्सों तक ही पहुंच पाया। ऐसे में माना जाता है कि बड़ी संख्या में सिक्के आज भी समुद्र की तलहटी में मलबे के साथ मौजूद हो सकते हैं।
यही वजह है कि SS John Barry का मलबा आज भी इतिहास और समुद्री खजाने की खोज से जुड़ी दिलचस्प कहानियों का हिस्सा बना हुआ है।
सिक्कों की कीमत सिर्फ चांदी नहीं थी
बरामद किए गए सिक्कों की खासियत सिर्फ उनकी चांदी नहीं थी। इनका ऐतिहासिक महत्व भी काफी बड़ा था।
ये सिक्के उस दौर की याद दिलाते हैं, जब सऊदी अरब का तेल उद्योग तेजी से विकसित हो रहा था और मजदूरों के भुगतान के लिए विशेष रूप से अमेरिकी टकसाल में सऊदी मुद्रा तैयार की गई थी।
इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण बरामद सिक्कों को सामान्य चांदी की तरह नहीं देखा गया। कुछ सिक्कों को नीलामी के जरिए कलेक्टरों तक पहुंचाया गया और इनके पूरे समूह को एक साथ बेचने की योजना भी बनाई गई।
खजाने के साथ जुड़ा एक और रहस्य
SS John Barry की कहानी सिर्फ बरामद किए गए सिक्कों तक सीमित नहीं है। जहाज के मलबे से जुड़ी चांदी की एक बड़ी मात्रा को लेकर बाद में विवाद और दावे भी सामने आए।
हालांकि 1994 के बचाव अभियान में बड़ी संख्या में चांदी के रियाल जरूर मिले, लेकिन कथित अतिरिक्त चांदी के संबंध में अलग दावे किए गए और उसके अस्तित्व तथा मालिकाना हक को लेकर विवाद भी सामने आया।
अदालती रिकॉर्ड में जहाज के डूबने की तारीख 28 अगस्त 1944 दर्ज है और उस पर अमेरिका में बने सऊदी अरब के करीब 30 लाख एक-रियाल के सिक्के लदे होने का उल्लेख मिलता है।
30 लाख में से कितने सिक्के अब भी समुद्र में हैं?
यही इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल है।
एक तरफ 1990 के दशक में लाखों सिक्के समुद्र से बाहर निकाले गए, जिन्हें बाद में नीलाम भी किया गया। दूसरी तरफ मूल कार्गो का बड़ा हिस्सा बरामद नहीं हो सका।
इसलिए SS John Barry की कहानी आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
करीब 80 साल पहले अरब सागर में डूबा यह जहाज अपने साथ लाखों चांदी के सिक्के लेकर समुद्र की गहराई में चला गया था। पांच दशक बाद खजाने का एक हिस्सा दुनिया के सामने आया, लेकिन माना जाता है कि मूल कार्गो का बाकी हिस्सा अब भी समुद्र की तलहटी में छिपा हो सकता है।
यानी SS John Barry सिर्फ एक डूबे हुए जहाज का मलबा नहीं, बल्कि इतिहास, युद्ध, तेल उद्योग और समुद्र में छिपे खजाने से जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जिसके कई पन्ने आज भी पानी के नीचे दबे हुए हैं।