दुनिया का हर ऐशो-आराम छोड़कर जंगल में रह रहा ये शख्स, खतरनाक जानवरों से कर ली दोस्ती
हर इंसान अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीना चाहता है। कोई बड़े शहरों की चकाचौंध में खुश रहता है तो किसी को प्रकृति की गोद ज्यादा भाती है। स्विट्जरलैंड के रहने वाले डीन श्नाइडर ने भी ऐसा ही फैसला किया और दुनिया की ऐशो-आराम भरी जिंदगी छोड़कर अफ्रीका के घने जंगलों का रास्ता चुन लिया।
बचपन से था जानवरों के प्रति खास लगाव
26 साल के डीन श्नाइडर को बचपन से ही जंगली जानवरों से बेहद लगाव था। इसी प्यार के चलते उन्होंने अपनी अच्छी-खासी आर्थिक सलाहकार की नौकरी छोड़ दी, शानदार घर को अलविदा कह दिया और निकल पड़े अफ्रीका के जंगलों में जानवरों के संरक्षण का सपना पूरा करने।
डीन कहते हैं,
"मैं जिन्हें प्यार करता हूं, उन्हें बचाना चाहता हूं।"
अफ्रीका में बसाई 'हकुना मिपाका'
साउथ अफ्रीका के जंगलों में डीन ने 360 हेक्टेयर जमीन खरीदी और वहां एक वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बनाई, जिसका नाम रखा 'हकुना मिपाका'। इस सेंचुरी का उद्देश्य स्वतंत्रता, ईमानदारी, भाईचारा और खुले व्यक्तित्व को बढ़ावा देना है।
यहां शेरों की बड़ी संख्या के अलावा कुदू, जेब्रा, लकड़बग्घा, लंगूर और एनाकोंडा जैसे खतरनाक जानवर भी रहते हैं। डीन न केवल इन जानवरों की देखभाल करते हैं बल्कि घायल जानवरों का इलाज भी खुद करते हैं।
2017 में लिया जिंदगी बदलने वाला फैसला
साल 2017 में डीन ने अपनी नौकरी छोड़ी और तय कर लिया कि वे अपना शेष जीवन जंगली जानवरों के संरक्षण में बिताएंगे। इसके बाद से डीन ने जानवरों के जीवन पर आधारित कई डॉक्युमेंट्रीज़ में भी काम किया है। वे सोशल मीडिया के जरिए दुनियाभर के लोगों को जानवरों के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
डीन कहते हैं,
"मेरा मकसद है लोगों को जानवरों की सुंदरता से परिचित कराना और यह बताना कि ये भी प्यार और सुरक्षा के हकदार हैं।"
निष्कर्ष
डीन श्नाइडर की कहानी यह दिखाती है कि अगर दिल में सच्चा जज्बा हो तो इंसान किसी भी हद तक जा सकता है। जहां अधिकतर लोग ऐशो-आराम को सर्वोच्च मानते हैं, वहीं डीन ने जंगलों की कठिन जिंदगी चुनकर यह साबित कर दिया कि असली खुशी प्रकृति के करीब रहने में है।