चाय-कॉफी छोड़ माचा टी के दीवाने हुए भारतीय! इंटरनेट पर सर्च बढ़ा 1300%, जानिए फायदे और बनाने का सही तरीका
भारत में सुबह की शुरुआत चाय के बिना अधूरी मानी जाती है। घर की किचन हो या सड़क किनारे की चाय की टपरी, दूध, चायपत्ती और अदरक-इलायची की खुशबू से दिन शुरू करने की आदत करोड़ों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन अब लोगों की पसंद में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है।हाल के Google Search ट्रेंड में जापानी ग्रीन टी यानी माचा (Matcha) को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, माचा की खोज में करीब 1300 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। इसके साथ ही उबे (Ube) और होजिचा (Hojicha) जैसे शब्द भी लोगों के बीच तेजी से चर्चा में आए हैं।लेकिन आखिर ये तीनों चीजें हैं क्या और अचानक इनके बारे में इतनी चर्चा क्यों हो रही है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
क्या होता है माचा?
माचा जापान की पारंपरिक ग्रीन टी का एक खास पाउडर रूप है। सामान्य ग्रीन टी में चाय की पत्तियों को गर्म पानी में डालकर उनका स्वाद और कुछ यौगिक पानी में निकाले जाते हैं और फिर पत्तियों को अलग कर दिया जाता है।
वहीं, माचा में चाय की पत्तियों को बारीक पीसकर पाउडर बनाया जाता है और उसे पानी या दूध के साथ सीधे पिया जाता है। यानी माचा पीने पर चाय की पत्ती का पूरा पाउडर ही सेवन किया जाता है।
माचा का रंग आमतौर पर गहरा हरा होता है और इसका स्वाद सामान्य चाय की तुलना में अलग होता है। इसमें हल्की कड़वाहट के साथ एक खास तरह का ताजा और मिट्टी जैसा स्वाद महसूस हो सकता है।
ग्रीन टी में कैटेचिन जैसे पॉलीफेनॉल और कैफीन पाए जाते हैं। हालांकि माचा को लेकर किए गए कई हेल्थ दावों के बावजूद, इसके सभी कथित फायदों को लेकर निर्णायक वैज्ञानिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं हैं।
Google पर माचा इतना ट्रेंड क्यों कर रहा है?
माचा की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे सोशल मीडिया का बड़ा योगदान माना जा रहा है। Instagram, YouTube और दूसरे प्लेटफॉर्म पर फिटनेस और लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट में Matcha Latte और Iced Matcha काफी दिखाई देते हैं।
इसके अलावा बड़े शहरों के कैफे में भी माचा से बने ड्रिंक और डेजर्ट तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। इसकी खास हरी रंगत भी सोशल मीडिया पर इसे आकर्षक बनाती है।
माचा में कैफीन होता है और ग्रीन टी में मौजूद कैफीन तथा अन्य यौगिकों का मानसिक सतर्कता और शरीर पर अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। लेकिन इसे कॉफी या चाय का कोई चमत्कारी विकल्प या हर व्यक्ति के लिए समान असर वाला पेय नहीं माना जा सकता।
क्या माचा वजन कम करता है?
माचा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा वजन घटाने को लेकर होती है। इसमें मौजूद कैफीन और कैटेचिन शरीर के वजन पर मामूली प्रभाव डाल सकते हैं, लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह साबित नहीं करते कि सिर्फ ग्रीन टी या माचा पीने से वजन तेजी से कम हो जाता है।
अगर कोई व्यक्ति वजन कम करना चाहता है तो संतुलित खान-पान, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। माचा को सिर्फ एक पेय के तौर पर डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
उबे क्या है?
माचा के साथ Ube यानी उबे भी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो रहा है।
उबे फिलीपींस में पाया जाने वाला एक बैंगनी रंग का कंद है। इसे देखने में शकरकंद जैसा समझा जा सकता है, लेकिन इसका रंग गहरा बैंगनी होता है और स्वाद हल्का मीठा होता है।
उबे का इस्तेमाल आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री, मिठाइयों और दूसरे डेजर्ट में किया जाता है। इसका चमकीला बैंगनी रंग सोशल मीडिया पर इसे खास तौर पर आकर्षक बनाता है।
होजिचा क्या है?
Hojicha यानी होजिचा भी जापान की एक तरह की चाय है, लेकिन इसे सामान्य ग्रीन टी से अलग तरीके से तैयार किया जाता है।
होजिचा की चाय की पत्तियों को भूनकर यानी रोस्ट करके तैयार किया जाता है। इसी वजह से इसका रंग हरे की बजाय भूरा और स्वाद थोड़ा टोस्टेड या भुना हुआ होता है।
इसमें सामान्य ग्रीन टी की तुलना में कैफीन कम हो सकता है, लेकिन इसकी वास्तविक मात्रा इस्तेमाल की गई चाय और बनाने के तरीके पर निर्भर करती है। इसलिए इसे पूरी तरह कैफीन-फ्री समझना सही नहीं होगा।
माचा पीने के संभावित फायदे
माचा में ग्रीन टी की पत्तियों से मिलने वाले कई यौगिक मौजूद होते हैं। इनमें कैटेचिन, पॉलीफेनॉल और कैफीन शामिल हैं।
1. एंटीऑक्सीडेंट यौगिक
ग्रीन टी में कैटेचिन जैसे पॉलीफेनॉल पाए जाते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि से जुड़े हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि माचा शरीर की सारी 'गंदगी' साफ कर देता है। ऐसे दावों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए।
2. सतर्कता में मदद
माचा में कैफीन मौजूद होता है, इसलिए यह जागरूकता और सतर्कता बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसका असर व्यक्ति की कैफीन संवेदनशीलता और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है।
3. वजन प्रबंधन में सीमित भूमिका
ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन और कैफीन का शरीर के वजन पर मामूली प्रभाव देखा गया है, लेकिन इसे वजन घटाने का पक्का या तेज तरीका नहीं माना जा सकता।
4. कोलेस्ट्रॉल पर संभावित असर
कुछ अध्ययनों में ग्रीन टी के सेवन से कुल और LDL कोलेस्ट्रॉल में मामूली कमी देखी गई है, लेकिन इसके प्रभाव सीमित हो सकते हैं और अधिकांश शोध सीधे माचा पेय पर नहीं किए गए हैं।
माचा पीते समय किन बातों का ध्यान रखें?
माचा में कैफीन होता है। इसलिए बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर कुछ लोगों को बेचैनी, नींद में परेशानी या कैफीन से जुड़े दूसरे लक्षण हो सकते हैं।
गर्भावस्था के दौरान कैफीन की मात्रा को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति नियमित दवाएं ले रहा है तो ग्रीन टी या उसके सप्लीमेंट्स के साथ संभावित इंटरैक्शन को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खास तौर पर ग्रीन टी के concentrated extracts और सप्लीमेंट्स के मामले में ज्यादा सावधानी जरूरी है।
घर पर कैसे बनाएं माचा?
माचा बनाना काफी आसान है।
सामग्री:
- 1 चम्मच माचा पाउडर
- करीब 60-80 मिलीलीटर गर्म पानी
- स्वाद के लिए थोड़ा शहद या गुड़, अगर चाहें
बनाने का तरीका:
सबसे पहले माचा पाउडर को एक कप या छोटे बाउल में छान लें, ताकि उसमें गांठें न रहें। अब इसमें गर्म पानी डालें और छोटी व्हिस्क की मदद से अच्छी तरह फेंटें।
अगर ऊपर हल्का झाग बन जाए तो माचा तैयार है।
इसे सीधे पिया जा सकता है या इसमें गर्म/ठंडा दूध मिलाकर Matcha Latte बनाया जा सकता है। गर्मियों में बर्फ डालकर Iced Matcha भी तैयार किया जा सकता है।
क्या माचा आपकी रोज की चाय की जगह ले सकता है?
यह पूरी तरह आपकी पसंद पर निर्भर करता है। अगर आपको इसका स्वाद पसंद है और आप कैफीन की मात्रा का ध्यान रखते हैं तो माचा को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है।
लेकिन सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल होने की वजह से इसे कोई 'सुपर ड्रिंक' मान लेना सही नहीं है। माचा के कुछ पोषण संबंधी गुण जरूर हैं, लेकिन यह संतुलित खान-पान, अच्छी नींद और नियमित व्यायाम की जगह नहीं ले सकता।
यानी अदरक-इलायची वाली अपनी प्यारी चाय को छोड़ना जरूरी नहीं है। अगर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं तो माचा, उबे या होजिचा को एक बार जरूर आजमा सकते हैं—बस ट्रेंड के साथ-साथ अपनी जरूरत और शरीर की प्रतिक्रिया का भी ध्यान रखें।