योगी सरकार का बड़ा फैसला? सर्वे रिपोर्ट लीक- इतने मंत्रियों और विधायकों के कटेंगे टिकट!
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब छह महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी है। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद भाजपा इस बार उम्मीदवारों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही है।
पार्टी ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने मौजूदा विधायकों के कामकाज, क्षेत्र में पकड़ और जनता के बीच लोकप्रियता का आकलन करने के लिए आंतरिक सर्वे कराया है। बताया जा रहा है कि यह सर्वे कई स्तरों पर गोपनीय तरीके से किया गया है। सर्वे के सामने आए संकेतों ने पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति को लेकर हलचल बढ़ा दी है।
करीब 128 मौजूदा विधायकों पर एंटी-इनकंबेंसी?
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, भाजपा के आंतरिक सर्वे में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ उनके विधानसभा क्षेत्रों में नाराजगी के संकेत मिले हैं। ऐसे में इन सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने या काटने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि संभावित बदलाव की जद में कुछ मंत्री और कई वरिष्ठ विधायक भी आ सकते हैं। पार्टी का फोकस ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर हो सकता है, जिनकी स्थानीय स्तर पर बेहतर पकड़ और स्वीकार्यता हो।
भाजपा संगठनात्मक रूप से उत्तर प्रदेश को छह क्षेत्रों में बांटकर चुनावी रणनीति तैयार करती है। सर्वे से जुड़े बताए जा रहे आंकड़ों के मुताबिक अलग-अलग क्षेत्रों में संभावित टिकट बदलाव की तस्वीर कुछ इस तरह है:
- पश्चिम क्षेत्र: 71 सीटों में से करीब 23-25 सीटों पर बदलाव की संभावना
- ब्रज क्षेत्र: 65 सीटों में से करीब 24-26 सीटों पर टिकट बदलने के संकेत
- अवध क्षेत्र: 82 सीटों में से करीब 26-28 सीटों पर मौजूदा उम्मीदवारों को बदला जा सकता है
- कानपुर क्षेत्र: 52 सीटों में से करीब 22-24 सीटों पर बदलाव के कयास
- काशी क्षेत्र: 72 सीटों में से करीब 19-21 सीटों पर टिकट कटने की संभावना
- गोरखपुर क्षेत्र: 62 सीटों में से करीब 18-22 सीटों पर बदलाव के संकेत
हालांकि, इन आंकड़ों और संभावित टिकट कटने को लेकर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम फैसला पार्टी की चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन के दौरान ही सामने आएगा।
भाजपा के सामने लगातार तीसरी जीत की चुनौती
उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्ता में वापसी की थी। 1985 के बाद यह पहला मौका था जब उत्तर प्रदेश में किसी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सत्तारूढ़ पार्टी लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल रही थी।
अब भाजपा की नजर 2027 में इस प्रदर्शन को दोहराने पर है। वहीं विपक्षी दल भी चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन से उत्साहित समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अपने गठबंधन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर अपना फोकस बनाए हुए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने के साथ दलित और मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
2022 में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। चुनाव परिणाम में भाजपा को 255 सीटें मिली थीं। इसके सहयोगी दलों ने भी कई सीटों पर जीत दर्ज की थी।
- भारतीय जनता पार्टी (BJP): 255 सीटें
- अपना दल (सोनेलाल): 12 सीटें
- निषाद पार्टी: 6 सीटें
- NDA गठबंधन: 273 सीटें
- कुल विधानसभा सीटें: 403
- बहुमत का आंकड़ा: 202 सीटें
अब 2027 का चुनाव भाजपा के लिए सिर्फ सत्ता बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की अग्निपरीक्षा भी माना जा रहा है। ऐसे में टिकट वितरण से लेकर मौजूदा विधायकों की परफॉर्मेंस तक, हर मुद्दे पर पार्टी की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।