आखिर क्यों प्रधानमंत्री नहीं बनी थीं सोनिया गांधी? 2004 के फैसले पर खुद किया खुलासा, राहुल और प्रियंका भी नहीं चाहते थे मां संभालें PM की कुर्सी
साल 2004 में लोकसभा चुनाव के नतीजों ने भारतीय राजनीति की तस्वीर बदल दी थी। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को जीत मिली और सोनिया गांधी के पास देश की प्रधानमंत्री बनने का मौका था। लेकिन उन्होंने सबको चौंकाते हुए प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनकी जगह डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। उस समय सोनिया गांधी के इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं। किसी ने इसे उनका व्यक्तिगत फैसला बताया तो किसी ने परिवार और राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा।
अब करीब 22 साल बाद सोनिया गांधी ने एक नए इंटरव्यू में इस फैसले के पीछे अपनी सोच के बारे में खुलकर बात की है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि उनके मन में पहले से ही यह बात स्पष्ट थी कि वह कभी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालना उनके स्वभाव और इच्छा के अनुरूप नहीं था।
सोनिया गांधी ने बताया क्यों ठुकराया था प्रधानमंत्री पद
सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में कहा कि 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद प्रधानमंत्री बनने का विकल्प उनके सामने था, लेकिन उन्होंने इस पद को स्वीकार नहीं करने का फैसला पहले ही मन में कर लिया था।
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनके दिमाग में यह बिल्कुल स्पष्ट था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी। यह उनके व्यक्तित्व और पसंद के मुताबिक नहीं था। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनकी राजनीति में आने के पीछे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि पार्टी और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की भावना थी।
दरअसल, 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और यूपीए गठबंधन को सरकार बनाने का मौका मिला था। सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था। लेकिन उन्होंने पद छोड़कर डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ाया। इसके बाद मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
राहुल और प्रियंका भी नहीं चाहते थे कि मां बनें प्रधानमंत्री
सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री नहीं बनने को लेकर पहले भी परिवार की सोच सामने आ चुकी है। साल 2008 में एक इंटरव्यू के दौरान प्रियंका गांधी से पूछा गया था कि क्या वह और राहुल गांधी अपनी मां को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते थे? इस पर प्रियंका ने साफ कहा था कि वह और राहुल दोनों नहीं चाहते थे कि उनकी मां प्रधानमंत्री बनें।
प्रियंका ने बताया था कि सोनिया गांधी का फैसला चुनाव से काफी पहले ही स्पष्ट था। राहुल और वह अपनी मां से बातचीत के दौरान कहते थे कि उन्हें पहले ही यह बात साफ कर देनी चाहिए कि वह प्रधानमंत्री पद नहीं चाहतीं। प्रियंका के मुताबिक, सोनिया गांधी का फैसला किसी बाहरी दबाव की वजह से नहीं, बल्कि उनकी अपनी इच्छा से लिया गया था।
यही वजह है कि 2004 में सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद ठुकराने के बाद भी परिवार की ओर से उनके फैसले को व्यक्तिगत पसंद बताया गया था।
राहुल गांधी को लेकर भी सामने आया था बड़ा दावा
सोनिया गांधी के इस फैसले को लेकर 2014 में पूर्व विदेश मंत्री के. नटवर सिंह ने भी एक अलग दावा किया था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी नहीं चाहते थे कि उनकी मां प्रधानमंत्री बनें। नटवर सिंह के मुताबिक, राहुल को डर था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद सोनिया गांधी की जान को भी वैसा ही खतरा हो सकता है, जैसा इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के साथ हुआ था।
हालांकि, यह नटवर सिंह का दावा था। उस समय कांग्रेस नेता अजय माकन ने उनके बयान को खारिज करते हुए इसे अपनी किताब के प्रचार से जुड़ा बताया था। इसलिए इस दावे और सोनिया गांधी के अपने हालिया बयान को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
राजीव गांधी की हत्या और परिवार में बना डर का माहौल
द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने अपने पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जुड़े दर्दनाक अनुभवों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद परिवार में डर का माहौल बन गया था। उन्हें हमेशा आशंका रहती थी कि राजीव गांधी के साथ भी कुछ अनहोनी हो सकती है।
सोनिया गांधी के मुताबिक, परिवार की सुरक्षा इतनी कड़ी कर दी गई थी कि राहुल और प्रियंका को स्कूल से भी हटा लिया गया था और उनकी सामान्य जिंदगी काफी सीमित हो गई थी। उन्होंने कहा कि उनके मन में हमेशा यह डर रहता था कि अगला निशाना राजीव गांधी हो सकते हैं। साल 1991 में उनकी यह आशंका सच साबित हुई, जब चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई।
10 नवंबर को रिलीज होगी सोनिया गांधी की किताब
सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू उनकी आने वाली संस्मरण पुस्तक Belonging: A Journey of Love को लेकर भी चर्चा में है। उनकी यह किताब 10 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाली है। इसमें उनके निजी जीवन, राजीव गांधी के साथ रिश्ते, परिवार की राजनीतिक यात्रा और भारतीय राजनीति के कई अहम दौर से जुड़े अनुभव सामने आने की उम्मीद है।
इस इंटरव्यू के बाद 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का उनका फैसला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सोनिया गांधी के ताजा बयान से यह स्पष्ट होता है कि उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नहीं बनने का फैसला किसी अचानक बने राजनीतिक दबाव का नतीजा नहीं था, बल्कि वह पहले से ही इस पद को स्वीकार नहीं करना चाहती थीं।