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UP Election Politics: पुराने फॉर्मूले से इनकार! कांग्रेस की 100 सीटों की मांग पर क्या होगा सपा का फैसला?

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव में पिछली बार की तुलना में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से करीब 100 सीटों की मांग की बात कही गई है, जबकि बातचीत के दौरान इससे अलग-अलग आंकड़े भी सामने आए हैं।

2017 के फॉर्मूले का दिया जा रहा हवाला

कांग्रेस की ओर से 2017 के सपा-कांग्रेस गठबंधन का उदाहरण दिया जा सकता है। उस चुनाव में दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा हुआ था और कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

अब 2027 के चुनाव को लेकर कांग्रेस अपने मौजूदा राजनीतिक आधार और हालिया चुनावी प्रदर्शन को सीट शेयरिंग की बातचीत में आधार बना रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर उत्तर प्रदेश की 80 में से 43 सीटें जीती थीं, जिनमें सपा की 37 और कांग्रेस की 6 सीटें थीं।

सपा किन बातों को देगी महत्व?

सीटों के बंटवारे में सिर्फ सीटों की संख्या ही नहीं, बल्कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की स्थिति और उम्मीदवार की क्षमता जैसे पहलुओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।

इनमें स्थानीय पकड़, पिछले चुनावों का प्रदर्शन, संगठन की स्थिति, सामाजिक समीकरण और मुकाबले की स्थिति जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। सपा की ओर से भी यह संकेत दिए गए हैं कि सीटों का फैसला जीतने की क्षमता और जमीनी स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

2022 के नतीजे भी रहेंगे अहम

2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ 2 सीटें आई थीं।

ऐसे में 2027 के लिए सीट शेयरिंग में 2017 के पुराने फॉर्मूले के साथ-साथ 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को भी चर्चा का आधार बनाया जा सकता है।

फिलहाल सपा और कांग्रेस के बीच सीटों की अंतिम संख्या तय नहीं हुई है। गठबंधन का फाइनल फॉर्मूला दोनों दलों के बीच होने वाली बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।