राजनीति का 'सरप्राइज एलिमेंट': क्या Congress की 'किसान अधिकार यात्रा' बिगाड़ेगी बड़े-बड़ों का खेल?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच कांग्रेस ने किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी में किसानों से सीधे संवाद करने की रणनीति बनाई है।
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस की किसान विंग 7 सितंबर से ‘किसान अधिकार यात्रा’ निकालेगी। करीब एक सप्ताह चलने वाली यह यात्रा मेरठ और सहारनपुर मंडल के अलग-अलग जिलों से होकर गुजरेगी। यात्रा की शुरुआत मुजफ्फरनगर से होगी और 13 सितंबर को गौतमबुद्धनगर के जेवर में इसका समापन किया जाएगा।
किसानों के गढ़ में मजबूत होने की कोशिश
पश्चिमी यूपी को लंबे समय से किसान राजनीति का मजबूत केंद्र माना जाता है। मुजफ्फरनगर और आसपास का इलाका खेती-किसानी और गन्ने की फसल के लिए जाना जाता है। इसे पश्चिमी यूपी की किसान राजनीति का अहम क्षेत्र माना जाता है और यहां राष्ट्रीय लोकदल का भी लंबे समय से प्रभाव रहा है।
कांग्रेस अब किसान अधिकार यात्रा के जरिए ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाना चाहती है। पार्टी का फोकस खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों को उठाने और किसानों से सीधे संवाद करने पर रहेगा।
सपा और रालोद के बीच हालिया राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस की इस सक्रियता को पश्चिमी यूपी में अपनी अलग राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि किसानों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच लगातार संपर्क 2027 के विधानसभा चुनाव में उसे फायदा पहुंचा सकता है।
खाद-बीज और फसलों के दाम होंगे प्रमुख मुद्दे
किसान अधिकार यात्रा के दौरान कांग्रेस की किसान विंग किसानों के अलावा खेत मजदूरों, महिला किसानों, ग्रामीण युवाओं, पशुपालकों और कृषि से जुड़े दूसरे वर्गों से भी बातचीत करेगी।
यात्रा में खाद और बीज की बढ़ती कीमतों, फसलों के उचित दाम, किसानों के अधिकार और स्थानीय समस्याओं जैसे मुद्दों को उठाया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि किसानों की समस्याओं को सीधे समझना और उन्हें प्रभावी तरीके से सरकार और जनता के सामने रखना यात्रा का मुख्य उद्देश्य है।
मुजफ्फरनगर से जेवर तक जाएगी यात्रा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष राजबहादुर के मुताबिक, 7 सितंबर को मुजफ्फरनगर से किसान अधिकार यात्रा की शुरुआत होगी। इसके बाद यात्रा शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद और हापुड़ से होते हुए 13 सितंबर को गौतमबुद्धनगर के जेवर पहुंचेगी।
यात्रा के दौरान हर जिले में विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय पर पड़ाव रखा जाएगा। यहां स्थानीय किसानों और ग्रामीण लोगों से संवाद करने के साथ उनकी समस्याओं और मांगों को समझने की कोशिश की जाएगी।
यात्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय और एआईसीसी के यूपी सह-प्रभारी सचिव संजीव आर्या हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
जिलेवार नेताओं को मिली जिम्मेदारी
किसान अधिकार यात्रा को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने अलग-अलग जिलों में समन्वयकों की जिम्मेदारी तय की है।
मुजफ्फरनगर: हरेंद्र त्यागी
शामली: आलम गुर्जर
बागपत: योगेश प्रधान
मेरठ: अवनीश काजला और कारी इरफान
गाजियाबाद: नरेंद्र सिंह चौहान, सुनील वर्मा और विवेक त्यागी
हापुड़: सुशील शर्मा और डॉ. मोहम्मद शोएब
गौतमबुद्धनगर: दिनेश अवाना, शहाबुद्दीन और जयचंद चौधरी
कांग्रेस की इस यात्रा को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में संगठन को मजबूत करने और किसानों के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की अहम कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।