×

PDA का नया चेहरा! अखिलेश यादव की लग्जरी बस में बदला संदेश, 2027 से पहले दलित-पिछड़े वोटों पर सपा का फोकस
 

 

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने PDA अभियान को नए अंदाज में आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में पहुंची करीब 15 मीटर लंबी लाल रंग की लग्जरी बस ने इस रणनीति की झलक दिखाई। बस पर ‘समाजवादी PDA यात्रा’ लिखा है और इसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, जनेश्वर मिश्र और बेनी प्रसाद वर्मा समेत कई प्रमुख नेताओं और महापुरुषों की तस्वीरें लगाई गई हैं।
बस के एक तरफ अखिलेश यादव और दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव की तस्वीर दिखाई देती है। वहीं, बस पर ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक-मुस्लिम’ जैसे संदेश भी लिखे गए हैं। सपा की इस पहल को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने सामाजिक समीकरण को विस्तार देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।


क्या है समाजवादी पार्टी का PDA फॉर्मूला?
अखिलेश यादव ने 2023 के आसपास PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को अपनी राजनीतिक रणनीति के प्रमुख हिस्से के तौर पर पेश किया था। इसका उद्देश्य यादव और मुस्लिम मतदाताओं के साथ गैर-यादव पिछड़ी जातियों और दलित समुदायों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाना रहा है।
सपा की रणनीति में कुर्मी, पाल, निषाद, राजभर, मौर्य और कश्यप जैसी पिछड़ी जातियों के साथ दलित मतदाताओं को जोड़ने पर जोर दिखाई देता है। पार्टी का प्रयास अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम आधार से आगे जाकर व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार करने का है।
2024 में सपा के प्रदर्शन से बढ़ा भरोसा
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 403 में से 111 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर करीब 32.1 फीसदी रहा था। इसके मुकाबले बीजेपी को करीब 41.3 फीसदी वोट मिले थे।
इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 37 पर जीत दर्ज की। सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में 62 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसी चुनाव में बीजेपी की सीटें घटकर 33 रह गईं।
2024 के नतीजों के बाद सपा ने अपने PDA सामाजिक समीकरण को लेकर आगे की रणनीति पर जोर बढ़ाया। पार्टी की कोशिश अब लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में दोहराने के लिए व्यापक सामाजिक समर्थन तैयार करने की है।


दलित वोट पर क्यों है सपा का फोकस?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। राज्य में अनुसूचित जाति के लिए 84 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। हालांकि दलित मतदाता केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं हैं और बड़ी संख्या में सामान्य सीटों पर भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने आरक्षित 84 सीटों में से बड़ी संख्या में सीटों पर जीत हासिल की थी। ऐसे में सपा के लिए दलित मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक लक्ष्य है।
इसी दिशा में पार्टी सामान्य सीटों पर भी बड़ी संख्या में दलित उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है। इसे PDA को संगठन और टिकट वितरण के स्तर पर मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
PDA को लेकर विरोधियों के अलग-अलग दावे
सपा के PDA फॉर्मूले को लेकर बीजेपी, बसपा और अन्य दलों के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। विरोधी नेता PDA की अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं करते हुए सपा की रणनीति पर सवाल उठाते हैं।
वहीं, अखिलेश यादव और सपा की ओर से PDA को सामाजिक न्याय और पिछड़े, दलित तथा अल्पसंख्यक वर्गों की राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर पेश किया जाता है। इस तरह PDA अब सपा की चुनावी रणनीति के साथ-साथ उसके राजनीतिक संदेश का भी प्रमुख हिस्सा बन चुका है।
2027 से पहले 'PDA 2.0' पर जोर
लोकसभा चुनाव के बाद सपा की रणनीति में PDA को और व्यापक रूप देने की कोशिश दिखाई दे रही है। पार्टी गैर-यादव पिछड़ी जातियों और दलितों के बीच अपना आधार बढ़ाने के साथ-साथ टिकट वितरण में भी इस सामाजिक समीकरण को जगह देने की तैयारी कर रही है।
सपा के लिए चुनौती यह है कि PDA के राजनीतिक संदेश को संगठन और जमीनी स्तर पर कितनी मजबूती मिलती है। 2027 के विधानसभा चुनाव में अलग-अलग सामाजिक समूहों का मतदान व्यवहार ही बताएगा कि यह रणनीति कितनी प्रभावी रहती है।
कैसी है सपा की नई लग्जरी बस?
सपा की PDA यात्रा के लिए तैयार की जा रही बस को सामान्य चुनावी रथ से अलग बताया जा रहा है। इसमें बुलेटप्रूफ ग्लास, हाइड्रोलिक लिफ्ट, मीटिंग रूम, सोफा-कम-बेड, किचन, वॉशरूम, CCTV कैमरे, LED स्क्रीन, वाई-फाई और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं होने की बात कही जा रही है।
इस बस की अनुमानित लागत को लेकर अलग-अलग दावे हैं और करीब 2 से 5 करोड़ रुपये तक का खर्च बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखिलेश यादव अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में इस बस के जरिए प्रदेशव्यापी यात्रा शुरू कर सकते हैं।
बस पर ‘PDA सामाजिक आंदोलन है’ और ‘PDA सामाजिक न्याय का संघर्ष है’ जैसे संदेश लिखे गए हैं। इसके साथ ही सामाजिक न्याय और बदलाव से जुड़े नारे भी दिखाई दे रहे हैं।
फिलहाल सपा की इस नई यात्रा का औपचारिक कार्यक्रम सामने आना बाकी है। लेकिन बस की तैयारियों से इतना साफ है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले PDA को अपने अभियान के केंद्र में रखने की तैयारी कर रही है।