Supreme Court Hearing: बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम कटने का मामला, नगर निकाय चुनाव से पहले जल्द सुनवाई की मांग
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपीलों का जल्द निपटारा करने की मांग की है, ताकि नवंबर में प्रस्तावित नगर निकाय चुनावों में पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर विचार करेगी। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। इससे पहले 9 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत ने संकेत दिया था कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की मांग वाली अपीलों को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा सकता है।
कोलकाता और हावड़ा की 1.70 लाख अपीलों का मामला
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील गोपाल शंकरनारायणन और प्रशांत भूषण ने अपीलों के शीघ्र निपटारे की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि समय रहते फैसले नहीं हुए, तो कई पात्र मतदाता आगामी नगर निकाय चुनावों में मतदान करने से वंचित रह सकते हैं।
अदालत को बताया गया कि कोलकाता और हावड़ा के नगर निकाय क्षेत्रों से संबंधित करीब 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी अनुरोध किया है कि जिन लोगों की अपीलों पर अभी फैसला नहीं हुआ है, उनके मतदान के अधिकार को लेकर उचित अंतरिम व्यवस्था पर विचार किया जाए।
नाम जोड़ने वाली अपीलों को मिल सकती है प्राथमिकता
9 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने SIR से संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनलों के कामकाज और अपीलों के निपटारे में इस्तेमाल हो रहे सॉफ्टवेयर की समस्याओं पर चर्चा की थी।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि इन दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि ट्रिब्यूनलों से पहले उन मामलों पर ध्यान देने को कहा जा सकता है, जिनमें मतदाता सूची में नाम शामिल करने की मांग की गई है। नाम हटाने से संबंधित अपीलों को फिलहाल प्राथमिकता से अलग रखने के विकल्प पर भी चर्चा हुई थी।
आज की सुनवाई में किन मुद्दों पर नजर रहेगी?
शुक्रवार की सुनवाई में अदालत के सामने मुख्य रूप से ये मुद्दे आ सकते हैं:
- मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ लंबित अपीलों का तेजी से निपटारा।
- कोलकाता और हावड़ा के मतदाताओं की अपीलों को नगर निकाय चुनाव से पहले प्राथमिकता देना।
- जिन पात्र मतदाताओं की अपीलों पर फैसला लंबित है, उनके मतदान के अधिकार को लेकर अंतरिम व्यवस्था की मांग।
हालांकि, इन मुद्दों पर अंतिम फैसला अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल लंबित अपील वाले सभी मतदाताओं को मतदान की अनुमति मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58.20 लाख नाम हटे
पश्चिम बंगाल में SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से 58.20 लाख नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुनरीक्षण से पहले राज्य में करीब 7.66 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि ड्राफ्ट सूची में लगभग 7.08 करोड़ नाम शामिल किए गए।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हटाए गए नामों में करीब 24.17 लाख ऐसे मतदाता थे जिन्हें मृत पाया गया। लगभग 1.38 लाख नाम डुप्लीकेट या फर्जी श्रेणी में बताए गए, जबकि 32.65 लाख मतदाताओं के नाम स्थान बदलने, पता नहीं चलने और अन्य कारणों से हटाए गए।
इन आंकड़ों के बीच नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों का निपटारा अहम हो गया है। याचिकाकर्ताओं का जोर इस बात पर है कि पात्र मतदाताओं को चुनाव से पहले अपनी स्थिति स्पष्ट कराने का अवसर मिले।
नगर निकाय चुनाव से पहले अहम होगी सुनवाई
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत यदि अपीलों के निपटारे के लिए समयसीमा तय करती है या नाम जोड़ने वाले मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश देती है, तो इससे लंबित मामलों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, मतदाताओं को मतदान की अनुमति देने और लंबित अपीलों के निपटारे को लेकर अदालत के आदेश का इंतजार है।