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ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: चुनाव आयोग से 4 दिन में मांगा टाइमलाइन, सिंबल पर मांगा स्पष्ट जवाब ​​​​​​​

 

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला कब तक लिया जा सकता है।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने चुनाव आयोग से निर्देश लेकर सोमवार, 28 सितंबर तक विवाद के निपटारे की संभावित समय-सीमा बताने को कहा है।

ममता गुट ने कहा- पार्टी के मूल नाम और चिन्ह की अनुमति मिले

ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि उनका पक्ष चुनाव रोकने की मांग नहीं कर रहा है, लेकिन उन्हें पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।

सिब्बल ने इसे पार्टी के अस्तित्व से जुड़ा मामला बताया और कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान चुनाव चिन्ह फ्रीज किए जाने से पार्टी की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आयोग जल्द फैसला करे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद का निपटारा चुनाव आयोग को उचित समय-सीमा में करना चाहिए।

चीफ जस्टिस ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू से कहा कि आयोग से निर्देश लेकर यह पता किया जाए कि इस मामले में अंतिम फैसला लेने के लिए कितना समय चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए और चुनाव आयोग को अपना स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

बागी गुट ने कहा- विस्तृत सुनवाई की जरूरत

दूसरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि मामले में दस्तावेज और सबूत दाखिल किए जाने हैं, इसलिए आयोग को फैसला लेने में समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि इतनी कम अवधि में विस्तृत सुनवाई पूरी करना आसान नहीं होगा।

चुनाव आयोग ने अंतरिम तौर पर फ्रीज किया है नाम और चिन्ह

चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर दिया था। आयोग ने यह कदम पार्टी के भीतर दो गुटों की ओर से पार्टी पर अधिकार के दावे के बीच उठाया।

यह व्यवस्था आगामी 6 अक्टूबर के उपचुनावों के लिए लागू की गई है। दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और फ्री सिंबल चुनने की अनुमति दी गई।

दोनों गुटों को मिले अलग नाम और चुनाव चिन्ह

ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिन्ह दिया गया है।

वहीं रितब्रत बनर्जी और अरूप रॉय से जुड़े गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। ये आवंटन फिलहाल आगामी उपचुनावों के संदर्भ में अंतरिम व्यवस्था का हिस्सा हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी, जब चुनाव आयोग से विवाद के अंतिम निपटारे की संभावित समय-सीमा बताने को कहा गया है।