×

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल! शरद पवार के बदले सुर से अटकलें तेज, क्या NDA में शामिल होने की तैयारी?

 

महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज़ हो गई हैं। मंगलवार देर रात करीब 11 बजे मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'वर्षा' पर एक बंद कमरे में बैठक हुई, जो लगभग एक घंटे तक चली। इसमें NCP (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और NCP (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे मौजूद थे। फिलहाल, बैठक में चर्चा किए गए मुद्दों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन कर सकती है, जिसे केंद्र सरकार दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि बजट सत्र के दौरान पार्टी ने इस विधेयक के खिलाफ वोट किया था, लेकिन BJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद उसका रुख बदल गया है। अब पार्टी संसद के आगामी मॉनसून सत्र (20 जुलाई से 13 अगस्त तक) के दौरान इस अहम विधेयक पर सरकार का समर्थन कर सकती है।

**अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं**
हालांकि, पार्टी ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। खबरों के मुताबिक, संविधान संशोधन विधेयक को पहले लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था, जिसके कारण यह पारित नहीं हो सका था। केंद्र सरकार अब मॉनसून सत्र के दौरान इसे दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है।

**पार्टी में संभावित फूट को रोकने की रणनीति**

राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि NCP (शरद पवार गुट) का समर्थन केवल इसी संविधान संशोधन विधेयक तक ही सीमित रहेगा। वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह फैसला पार्टी में संभावित फूट को रोकने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। हाल ही में ऐसी अटकलें हैं कि पार्टी के कुछ सांसद BJP या शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं।

**फडणवीस ने भी शरद गुट से संपर्क किया**

सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और BJP के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस मुद्दे पर शरद पवार गुट से संपर्क किया था। इन संपर्कों के बाद समर्थन देने पर आम सहमति बनाने के लिए बातचीत हुई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर NCP (शरद पवार) की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में, पार्टी का अंतिम और औपचारिक रुख तभी स्पष्ट होगा जब संसद में विधेयक पेश किया जाएगा।