SIR Protest: बस में बैठाने के बाद राहुल-प्रियंका ने बदला प्लान, आकाशवाणी परिसर में 8 घंटे चला धरना
SIR के विरोध में मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग तक ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकालने की कोशिश की। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर मार्च रोक दिया और कई नेताओं को बसों में बैठाकर प्रदर्शन समाप्त कराने की तैयारी शुरू कर दी। इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अचानक रणनीति बदल दी।
दोनों नेता बस से उतरकर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। इसके बाद कुछ घंटे में खत्म होने की उम्मीद वाला प्रदर्शन देर शाम तक जारी रहा। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को परिसर से हटाने में कई घंटे लग गए।
सुबह संसद परिसर से शुरू हुआ मार्च
सुबह करीब 10 बजे INDIA ब्लॉक के विपक्षी सांसद संसद परिसर के मकर द्वार के पास जुटे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और सुप्रिया सुले समेत कई सांसद चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़े।
करीब 11 बजे के बाद पुलिस ने नीति आयोग के पास बैरिकेड लगाकर रास्ता रोक दिया। विपक्षी सांसदों ने आगे जाने की मांग की और सड़क पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी नारे लगाए।
राहुल गांधी ने बैरिकेड पर चढ़कर लहराया तिरंगा
करीब 11:40 से 12 बजे के बीच राहुल गांधी पुलिस के बैरिकेड पर चढ़ गए और वहां तिरंगा लहराया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया जाने लगा।
अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं को पुलिस बसों में ले गई। उस समय ऐसा लग रहा था कि मार्च और प्रदर्शन जल्द खत्म हो जाएगा।
राहुल-प्रियंका ने अचानक बदली रणनीति
करीब 12:20 बजे घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ लिया। प्रियंका गांधी पहले से पुलिस की बस में बैठी थीं और राहुल गांधी भी बस में जाने वाले थे। लेकिन राहुल ने प्रियंका से बातचीत के बाद बस में जाने के बजाय आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट की ओर जाने का फैसला किया।
उनके पीछे इमरान प्रतापगढ़ी, केसी वेणुगोपाल, दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा और कुमारी शैलजा समेत कुछ अन्य नेता भी पहुंच गए।
गेट पर राहुल को रोकने की कोशिश की गई, जिसके बाद वह परिसर के अंदर चले गए। इसके बाद राहुल और प्रियंका बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए।
पुलिस की अपील के बावजूद जारी रहा धरना
पुलिस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से परिसर खाली करने की कई बार अपील की गई। दोपहर करीब 12:30 बजे भी उन्हें वहां से हटने को कहा गया।
राहुल ने सवाल किया कि अगर उन्हें वहां से हटाया जा रहा है तो उन्हें यह बताया जाए कि वे शांतिपूर्ण विरोध कहां कर सकते हैं। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और नेताओं को वहां से हटाने की कोशिश की, लेकिन धरना जारी रहा।
प्रदर्शन को लंबा खींचने की बनी रणनीति
आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठने के बाद प्रदर्शन का स्वरूप बदल गया। अगर सभी नेता पुलिस बसों में चले जाते तो मार्च वहीं समाप्त हो सकता था। लेकिन राहुल और प्रियंका के परिसर में बैठने से विरोध जारी रहा।
विपक्ष ने इस दौरान SIR के मुद्दे के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की मांग भी उठाई। हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों की ओर से कहा गया कि उन्हें किसी राजनीतिक दल की तरफ से औपचारिक मुलाकात का अनुरोध नहीं मिला था।
शाम तक जारी रहा विरोध
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस नेताओं का धरना कई घंटे तक चला। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को परिसर से हटाने में 8 घंटे से ज्यादा का समय लगा। इस तरह पुलिस द्वारा प्रदर्शन को जल्दी खत्म कराने की कोशिश के बीच राहुल-प्रियंका के अचानक रणनीति बदलने से पूरा घटनाक्रम लंबा खिंच गया।