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विपक्ष के दोहरे रवैये पर संबित पात्रा का हमला: SIR मुद्दे पर बात न हो तो तानाशाही, बात हो तो ऐतराज!

 

मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। नई दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पार्टी सांसद संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि SIR से जुड़े फैसले तय संवैधानिक और आधिकारिक प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं।

संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों के बीच SIR को लेकर अंतिम निर्णय पर कोई असहमति नहीं थी। हालांकि, इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मीडिया रिपोर्ट्स में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा भी सामने आया है। चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों को निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति का BJP का दावा

संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के बयान का हवाला देते हुए कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए। उनके मुताबिक, आयोग में अलग-अलग स्तर पर सवाल, सुझाव या विचार-विमर्श होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अंतिम निर्णय आयोग की ओर से सामूहिक रूप से लिया जाता है।

चुनाव आयोग ने भी अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि आयुक्तों की ओर से ड्राफ्ट स्तर पर दिए गए सुझाव या अलग-अलग टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। आयोग के मुताबिक, अंतिम आदेश और फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई।

14 बार हुई बातचीत का संबित पात्रा ने किया जिक्र

BJP सांसद ने उन रिपोर्ट्स के संदर्भ में भी बात की, जिनमें तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच पिछले 10 महीनों में कई मौकों पर पत्राचार और आपत्तियों का जिक्र किया गया है।

संबित पात्रा ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच 14 मौकों पर आधिकारिक बातचीत और विचार-विमर्श हुआ। उनके अनुसार, आयोग के सदस्यों का किसी मुद्दे पर चर्चा करना लोकतांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह आयोग के कामकाज को लेकर अलग-अलग परिस्थितियों में सवाल उठा रहा है।

विपक्ष पर संबित पात्रा का हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर चुनाव आयोग समेत संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है।

हालांकि, ये संबित पात्रा और BJP की राजनीतिक टिप्पणियां हैं। इन्हें चुनाव आयोग के आधिकारिक रुख से अलग समझना जरूरी है।

विवाद की असली वजह क्या है?

SIR को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों की संख्या कम से कम 14 बताई गई।

इसके बाद चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सदस्यों की ओर से अलग-अलग राय, सवाल और सुझाव देना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया है। आयोग ने कहा कि अंतिम निर्णय, जिसमें SIR भी शामिल है, तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए।

इस तरह SIR को लेकर फिलहाल दो बातें स्पष्ट हैं—एक तरफ कुछ रिपोर्ट्स में आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर आपत्तियों का उल्लेख है, वहीं चुनाव आयोग का आधिकारिक रुख है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इसी मुद्दे पर BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए आयोग के स्पष्टीकरण को सामने रखा है।