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SIR और वोटर लिस्ट विवाद पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, चुनाव आयोग की 14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट से बढ़ा सियासी विवाद

 

चुनाव आयोग, SIR और वोटर लिस्ट को लेकर चल रहा विवाद अब और गरमा गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 24 सितंबर को इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने जिस मुद्दे को उठाया था, उस पर अब नए तथ्य सामने आए हैं और उन्होंने न्याय मिलने की बात कही है।राहुल गांधी की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के बाद हो रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति या टिप्पणी दर्ज की।

क्या है 14 आपत्तियों का मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दर्ज की गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि इनमें वोटर लिस्ट, नए मतदाताओं के पंजीकरण, Form-6, वोटर डेटा और SIR से जुड़ी प्रक्रियाओं जैसे मुद्दे शामिल थे।रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने निर्णय लेने की प्रक्रिया और जानकारी साझा किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपने पक्ष में कहा कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने 14 लिखित नोट्स के अस्तित्व से इनकार नहीं किया, लेकिन उन्हें निर्णय प्रक्रिया के दौरान दिए गए सुझाव और टिप्पणियां बताया।

इस तरह एक तरफ रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का जिक्र है, वहीं आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

राहुल गांधी पहले भी उठा चुके हैं 'वोट चोरी' का मुद्दा

राहुल गांधी इससे पहले भी चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने 2025 और उसके बाद कई मौकों पर चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर आरोप लगाए हैं।

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और BJP के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगाए थे। चुनाव आयोग ने इससे पहले ऐसे आरोपों को खारिज किया है और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपने पक्ष में जवाब दिया है।

SIR को लेकर क्या है विवाद?

SIR यानी Special Intensive Revision के तहत वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं से जुड़ी जानकारी को सत्यापित करना है।

हालांकि, SIR के दौरान वोटरों के नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लगातार विवाद रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी SIR से जुड़े कुछ फैसलों और वोटर डेटा के प्रबंधन को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।

अब राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं BJP और चुनाव आयोग ने अपने-अपने स्तर पर इन आरोपों का जवाब दिया है।

अब राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह देखना अहम होगा कि वह 14 लिखित आपत्तियों, SIR, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर क्या नए तथ्य या दस्तावेज सामने रखते हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले में एक बात स्पष्ट है कि दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों और आयोग के सर्वसम्मति से फैसले लेने के दावे के बीच राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है।