Rahul Gandhi Case: सिख समुदाय पर बयान को लेकर राहुल गांधी को राहत, FIR दर्ज कराने की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय को लेकर दिए गए कथित बयान के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
अमेरिका में दिए बयान पर हुआ था विवाद
राहुल गांधी ने 10 सितंबर 2024 को अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि भारत में सिख समुदाय के लोगों के मन में इस बात को लेकर चिंता है कि क्या उन्हें पगड़ी और कड़ा पहनने की अनुमति मिलेगी और क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसी चिंताएं केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी धर्मों के लोगों से जुड़ी हैं।
अपने भाषण में राहुल ने भाजपा और RSS की विचारधारा पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि भाजपा भारत की विविधता को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया था कि RSS कुछ राज्यों, भाषाओं, धर्मों और समुदायों को दूसरों से कमतर मानती है। राहुल के इसी बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।
FIR दर्ज नहीं होने पर अदालत पहुंचे थे याचिकाकर्ता
वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर उन्होंने अदालत का रुख किया।
मजिस्ट्रेट द्वितीय ने 28 नवंबर 2024 को याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से संबंधित है, इसलिए यह उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने एमपी-एमएलए कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की, जिसे 21 जुलाई 2025 को स्वीकार कर लिया गया।
इस आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में मामला वाराणसी की एसीजेएम चतुर्थ अदालत में पहुंचा। एसीजेएम नीरज त्रिपाठी ने घटना की तारीख और समय का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने का हवाला देते हुए शिकायत फिर खारिज कर दी। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने एडीजे पंचम की अदालत में दोबारा निगरानी याचिका दाखिल की।
राहुल गांधी ने लिखित जवाब में क्या कहा था?
राहुल गांधी ने 25 अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल किया था। उन्होंने याचिका को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा था कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
राहुल ने अपने जवाब में कहा था कि वे सिख समुदाय सहित सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करते हैं। अमेरिका में दिया गया उनका बयान सिख समुदाय के हितों और दुनिया भर में उसके सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करने के उद्देश्य से था। उनका तर्क था कि टिप्पणी सिख समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके सम्मान और हितों के समर्थन में की गई थी।
BNSS की धारा 208 का भी दिया था हवाला
राहुल गांधी ने अपने जवाब में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 208 का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत के बाहर कथित रूप से किए गए अपराध की जांच या सुनवाई के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी होती है। उनके मुताबिक, इस मामले में उनके बयान से कोई अपराध नहीं बनता और न ही सिख समुदाय का अपमान हुआ है।
हाईकोर्ट ने अब राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।