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UP चुनाव से पहले INDIA गठबंधन में 'बड़े भाई' बनने की होड़: रायबरेली से अखिलेश की रथ यात्रा पर अजय राय का पलटवार

 

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तल्खी बढ़ती दिख रही है। अखिलेश यादव द्वारा राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी 'PDA रथ यात्रा' की शुरुआत करने के बाद दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इसे सपा का चुनावी शंखनाद माना जा रहा है, जिस पर अब एनडीए (NDA) भी चुटकी ले रहा है।

1. अखिलेश की रणनीति और अजय राय का पलटवार

  • सपा का संदेश: अखिलेश यादव का रायबरेली (कांग्रेस के गढ़) से यात्रा शुरू करना एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। सपा यह संदेश देना चाहती है कि यूपी में भाजपा के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल वही है।

  • अजय राय की चेतावनी: यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, "चुनाव का समय है, कोई कहीं भी जा सकता है। अगर अखिलेश रायबरेली-अमेठी आ सकते हैं, तो हम भी कन्नौज, मैनपुरी और सैफई जा सकते हैं।"

  • बराबरी की कोशिश: लोकसभा चुनाव में 6 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर नहीं रहना चाहती और सपा के साथ बराबरी के स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

2. गठबंधन की रणनीति प्रियंका गांधी तय करेंगी

गठबंधन के भविष्य को लेकर अजय राय ने साफ किया कि यूपी में सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी तय करेंगी। यानी कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व ही इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेगा।

3. पहले भी रही है तल्खी

सपा और कांग्रेस के बीच प्रेशर पॉलिटिक्स नई नहीं है:

  • 2023 मध्य प्रदेश चुनाव: सीट बंटवारे को लेकर विवाद के बाद अजय राय ने सपा को यूपी तक सीमित रहने की सलाह दी थी, जिस पर अखिलेश यादव ने बेहद तल्ख टिप्पणी की थी।

  • ताजा बयानबाज़ी: हाल ही में सपा सांसद इकरा हसन और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों से भी दोनों दलों के बीच का तनाव खुलकर सामने आ चुका है।

निष्कर्ष: टूटेगा नहीं, पर दबाव बनाएगा 'इंडिया' गठबंधन

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बयानों का मतलब यह नहीं है कि गठबंधन टूट जाएगा। दोनों दल जानते हैं कि भाजपा को हराने के लिए उनका साथ आना जरूरी है। हालांकि, चुनाव से पहले ज्यादा से ज्यादा सीटों पर दावेदारी ठोकने के लिए यह 'प्रेशर पॉलिटिक्स' और वर्चस्व की जंग शुरू हो चुकी है।