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राजस्थान से हरियाणा-हिमाचल तक सियासी गदर: 16 घंटे भटके पार्षद, 1 वोट से पलटी बाजी; Congress की जीत

 

राजस्थान के तिजारा नगर परिषद का सभापति चुनाव बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बीच पूरा हुआ। चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में करने की कोशिश, हिमाचल प्रदेश से हरियाणा तक राजनीतिक हलचल, पुलिस पर आरोप-प्रत्यारोप, हाईकोर्ट में मामला और फिर बस की खिड़की का शीशा टूटने की घटना ने पूरे चुनाव को सुर्खियों में ला दिया।करीब 16 घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद आखिरकार कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रामावतार सैनी ने एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की।

35 पार्षदों के बीच थी सभापति की लड़ाई

तिजारा नगर परिषद में कुल 35 पार्षद सभापति का चुनाव करने वाले थे। इनमें बड़ी संख्या निर्दलीय पार्षदों की थी। यही वजह थी कि चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए निर्दलीय पार्षद बेहद महत्वपूर्ण हो गए।

कांग्रेस ने निर्दलीय पार्षद रामावतार सैनी को अपना समर्थन दिया। वहीं बीजेपी समर्थित खेमे ने भी निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ रखने की कोशिश की। चुनाव से पहले दोनों पक्षों की ओर से पार्षदों की बाड़ाबंदी की खबरें सामने आईं।

हिमाचल से शुरू हुआ सियासी सफर

कांग्रेस समर्थित निर्दलीय पार्षदों का एक समूह हिमाचल प्रदेश के कसौल में था। मतदान के लिए उन्हें तिजारा पहुंचना था। लेकिन राजस्थान लौटते समय हरियाणा के पंचकूला इलाके में पूरा घटनाक्रम बदल गया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उनके समर्थक पार्षदों को रास्ते में रोकने की कोशिश की गई। पार्टी नेताओं का दावा था कि पुलिस और अन्य लोगों की मौजूदगी के कारण पार्षद मतदान केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे थे।

कांग्रेस नेता इमरान खान ने दावा किया कि पार्षदों को करीब 16 से 20 घंटे तक अलग-अलग जगहों पर रुकना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों को लेकर पुलिस की ओर से अलग पक्ष सामने आया।

बस के अंदर क्या हुआ?

मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया जब कांग्रेस समर्थक पार्षदों को ले जा रही बस को लेकर विवाद सामने आया।

कांग्रेस समर्थक पार्षदों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बस के अंदर पहुंचे और उन्हें नीचे उतरने के लिए कहा गया। इसी दौरान बस की खिड़की का शीशा टूट गया और कुछ पार्षद टूटे शीशे वाली खिड़की से बाहर निकलते दिखाई दिए।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पार्षदों को मतदान से दूर रखने की कोशिश की जा रही थी। दूसरी ओर, पुलिस ने पार्षदों को हिरासत में लेने या मतदान में बाधा डालने के आरोपों से इनकार किया।

मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा

जैसे-जैसे मतदान का समय नजदीक आ रहा था, कांग्रेस समर्थित खेमे की चिंता बढ़ती गई। पार्टी की ओर से हाईकोर्ट का रुख किया गया। कांग्रेस का आरोप था कि उसके समर्थक पार्षदों को मतदान प्रक्रिया में शामिल होने से रोका जा रहा है।

मामले में कानूनी दखल के बाद मतदान की समय सीमा बढ़ाने की व्यवस्था हुई। इससे उन पार्षदों को मतदान में शामिल होने का मौका मिला, जो रास्ते में फंसे होने का दावा कर रहे थे।

रात तक चली वोटिंग

पूरे घटनाक्रम के बीच पार्षद आखिरकार तिजारा पहुंचे और मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई। चुनाव में कुल 35 पार्षदों ने वोट डाला। इनमें से एक वोट अवैध घोषित किया गया।

इसके बाद मतगणना हुई तो मुकाबला बेहद करीबी निकला।

एक वोट ने बदल दिया पूरा खेल

मतगणना में कांग्रेस समर्थित रामावतार सैनी को 18 वोट मिले, जबकि बीजेपी समर्थित सुभाष चंद सैनी को 16 वोट मिले। एक वोट निरस्त हो गया।

इस तरह रामावतार सैनी ने महज एक वैध वोट के अंतर से तिजारा नगर परिषद के सभापति पद पर जीत दर्ज कर ली।

हिमाचल से शुरू हुई पार्षदों की आवाजाही, हरियाणा में हुआ विवाद, पुलिस पर लगाए गए आरोप, हाईकोर्ट की दखल, बस की टूटी खिड़की और देर रात तक चली वोटिंग—इन सबके बाद तिजारा सभापति चुनाव का फैसला आखिरकार सिर्फ एक वोट से हुआ।