☰
×

Parliament Monsoon Session: 54 दिन बाद भी संसद का सत्रावसान नहीं, 1989 का रिकॉर्ड टूटा; जानें क्या है वजह
 

 

संसद के 2026 के मानसून सत्र की बैठकें खत्म हुए करीब दो महीने होने वाले हैं, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा का सत्र अब तक औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है। दोनों सदनों को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था, लेकिन मंगलवार तक सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं हुई।
इसके साथ ही लोकसभा और राज्यसभा के एक साथ बिना सत्रावसान रहने की अवधि अब 54 दिन हो गई है। यह 1989 के पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। उस समय दोनों सदन 53 दिन तक ऐसी स्थिति में रहे थे।
सत्र दोबारा बुलाने का विकल्प अभी खुला
सत्रावसान नहीं होने का मतलब है कि सरकार जरूरत पड़ने पर इसी मानसून सत्र की बैठक दोबारा बुला सकती है। अगर सत्रावसान हो जाता है तो नया सत्र बुलाने की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
सत्तारूढ़ खेमे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में संसद की बैठक दोबारा बुलाने की संभावनाओं को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक न तो बैठक बुलाने की आधिकारिक घोषणा की गई है और न ही कोई एजेंडा सामने आया है।
राजनीतिक गलियारों में परिसीमन, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े अगले कदमों को लेकर भी चर्चा है।
सत्रावसान न होने से अध्यादेश का रास्ता बंद
राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार के मुताबिक, सत्रावसान नहीं होने से सरकार के पास मौजूदा सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प बना हुआ है। वहीं इसका एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रभाव अध्यादेश को लेकर है।
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति अध्यादेश तब जारी कर सकते हैं, जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों। ऐसे में संसद का सत्रावसान नहीं होने तक अध्यादेश जारी करने का रास्ता उपलब्ध नहीं रहता।
लोकसभा में 114 घंटे में सिर्फ 17 घंटे 30 मिनट काम
2026 के मानसून सत्र में लोकसभा की कुल 19 बैठकें हुईं। सामान्य तौर पर एक दिन में करीब 6 घंटे कार्यवाही का समय माना जाए तो 19 बैठकों में लगभग 114 घंटे काम होना था।
हालांकि, वास्तविक कार्यवाही करीब 17 घंटे 30 मिनट ही चली। इस तरह करीब 96 घंटे 30 मिनट का निर्धारित समय कार्यवाही में इस्तेमाल नहीं हो सका।
राज्यसभा में भी कामकाज प्रभावित
राज्यसभा में भी मानसून सत्र के दौरान 19 बैठकें हुईं। करीब 114 घंटे की संभावित कार्यवाही के मुकाबले सदन में लगभग 37 घंटे 24 मिनट ही काम हुआ।
इस हिसाब से करीब 76 घंटे 36 मिनट का समय कार्यवाही में इस्तेमाल नहीं हो सका। यानी दोनों सदनों में बड़ी मात्रा में निर्धारित समय हंगामे और अन्य कारणों से प्रभावित रहा।
12 नए बिल पेश, 11 को दोनों सदनों की मंजूरी
मानसून सत्र के दौरान कुल 12 नए विधेयक पेश किए गए। इनमें 10 बिल लोकसभा और 2 बिल राज्यसभा में पेश किए गए। इनका संबंध टैक्स, बैंकिंग, खनन, ट्रिब्यूनल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, परीक्षा में नकल रोकने, केरल का नाम बदलने और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने जैसे विषयों से था।
माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल के राज्यसभा से पारित होने के बाद 12 में से 11 बिल दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं। केवल भारतीय सांख्यिकी संस्थान से संबंधित बिल अभी दोनों सदनों से पारित नहीं हुआ है।
इस तरह मानसून सत्र की बैठकें खत्म होने के बावजूद औपचारिक सत्रावसान नहीं होने से संसद की कार्यवाही को लेकर आगे की संभावनाएं बनी हुई हैं।