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दिल्ली में आज विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: जंतर-मंतर पर लगेगी 'सड़क संसद', CEC के खिलाफ आर-पार के मूड में INDIA गठबंधन

 

देश की राजनीति में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। INDIA गठबंधन के विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।

ताजा मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दलों की ओर से 31 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘चलो दिल्ली’ रैली प्रस्तावित है। इस अभियान के जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाना चाहता है।

आज क्या है विपक्ष का कार्यक्रम?

रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे प्रतीकात्मक कार्यवाही की शुरुआत करेंगे, जबकि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भी इसमें शामिल होने और समापन वक्तव्य देने की जानकारी सामने आई है।

विपक्ष की इस पहल को वास्तविक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया के बजाय एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में समझना चाहिए। कार्यक्रम का उद्देश्य चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दबाव बनाना है।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली

विपक्षी INDIA गठबंधन की अगली बड़ी गतिविधि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली है। इस कार्यक्रम में चुनावी सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों को उठाए जाने की संभावना है।

रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने रैली के लिए मार्च के मार्ग की जानकारी भी साझा की है। दिल्ली में कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की खबरें सामने आई हैं।

विपक्ष की मांग क्या है?

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और चुनाव आयोग की भूमिका पर चर्चा होनी चाहिए।

दूसरी ओर, इन आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने से पहले संबंधित दस्तावेजों, चुनाव आयोग के जवाब और आधिकारिक जांच की स्थिति को देखना जरूरी है।

दिल्ली की राजनीति पर रहेगी नजर

31 अक्टूबर और 1 नवंबर के इन कार्यक्रमों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्षी दलों की एकजुटता कितनी मजबूत रहती है, रैली में कितनी भागीदारी होती है और चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया आती है।