Nepal Flood Alert: बिहार को बाढ़ से बचाने के लिए 4 ग्लेशियर झीलों का जलस्तर घटाएगा नेपाल, ₹474 करोड़ की योजना
नेपाल हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों से बनी झीलों के फटने और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा कम करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत चार संवेदनशील झीलों का जलस्तर घटाया जाएगा। करीब 474 करोड़ रुपये की इस परियोजना का लाभ नेपाल के साथ भारत के बिहार राज्य को भी मिलने की उम्मीद है। परियोजना को 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बिहार में बाढ़ का खतरा घटाने पर जोर
नेपाल सरकार ने इस परियोजना के लिए चार झीलों की पहचान की है। इनमें मनांग जिले की थुलागी, संखुवासभा की लोअर वरुण और होंगु-2 तथा सोलुखुम्बु की लुम्दिंग झील शामिल हैं। ये झीलें समुद्र तल से लगभग 4,050 से 5,483 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं।
योजना के तहत होंगु-2 झील का जलस्तर एक मीटर घटाया जाएगा, जबकि थुलागी, लोअर वरुण और लुम्दिंग झीलों का जलस्तर तीन-तीन मीटर कम करने की योजना है।
इनमें से तीन झीलों का पानी कोशी और गंडकी नदी प्रणालियों में पहुंचता है। ये नदियां भारत में बिहार के क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में झीलों से अचानक पानी निकलने का जोखिम कम होने पर बिहार की बस्तियों, कृषि भूमि, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी राहत मिल सकती है।
नहरों और गेट की मदद से कम होगा जलस्तर
परियोजना के तहत झीलों के किनारे पानी बाहर निकालने के लिए नहरें बनाई जाएंगी। इनमें गेट लगाए जाएंगे, ताकि पानी का बहाव नियंत्रित किया जा सके। पानी को एक साथ छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे नदियों में पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
योजना में विस्फोटकों के इस्तेमाल के बजाय मजदूरों की मदद और तकनीकी तरीकों से निर्माण करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य काम के दौरान संभावित जोखिमों को कम रखना है।
दुर्गम इलाके और मौसम के कारण लंबी समयसीमा
ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में काम करना चुनौतीपूर्ण है। यहां खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण साल में केवल पांच से छह महीने ही निर्माण कार्य संभव हो पाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञ डॉ. भट्टराई का कहना है कि लगातार अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर झीलों का जलस्तर घटाने का काम तीन साल में किया जा सकता है। हालांकि, सीमित कार्य अवधि को देखते हुए परियोजना पूरी करने के लिए 2033 की समयसीमा तय की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस योजना से बाढ़ का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। लेकिन जिन चार झीलों से सबसे अधिक नुकसान की आशंका है, उन्हें प्राथमिकता देने से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत, नेपाल और चीन की 47 झीलें संवेदनशील
नेपाल की भोटेकोशी नदी में अगस्त में आई बाढ़ ने ग्लेशियरों से बनी झीलों के संभावित खतरे को फिर चर्चा में ला दिया था। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट की 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, नेपाल और चीन की 47 हिमनद झीलों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया था।
रिपोर्ट में नेपाल की 21, चीन की 25 और भारत की एक झील शामिल बताई गई थी। इनमें से 42 झीलों का पानी कोशी नदी प्रणाली में पहुंचता है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 24 झीलें चीन और 18 नेपाल में स्थित हैं।
कोशी नदी नेपाल से भारत के बिहार में प्रवेश करती है। इसलिए इन झीलों में अचानक पानी बढ़ने या झीलों के फटने की स्थिति दोनों देशों के लिए बाढ़ का खतरा पैदा कर सकती है।
परियोजना के लिए ग्रीन क्लाइमेट फंड देगा ₹343 करोड़
चार झीलों का जलस्तर घटाने की परियोजना की कुल अनुमानित लागत 474 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें सबसे बड़ा योगदान ग्रीन क्लाइमेट फंड का होगा।
- ग्रीन क्लाइमेट फंड: 343 करोड़ रुपये
- नेपाल सरकार: 107 करोड़ रुपये
- UNDP: 20 करोड़ रुपये
- निजी क्षेत्र: लगभग 3 करोड़ रुपये
परियोजना से नेपाल में 38 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है। साथ ही, बाढ़ से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान में करीब 212 करोड़ रुपये तक की कमी आने की उम्मीद जताई गई है।
कुल मिलाकर, नेपाल की यह पहल हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाले जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन परियोजना के क्रियान्वयन और झीलों के जलस्तर में होने वाले बदलाव के आधार पर ही किया जा सकेगा।