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मराठा आरक्षण पर फिर बढ़ा सियासी ताप, मनोज जरांगे आज से शुरू करेंगे 11वीं भूख हड़ताल
 

 


महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल शनिवार (29 अगस्त) से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपनी 11वीं भूख हड़ताल शुरू करने जा रहे हैं। जरांगे ने सरकार पर मराठा समाज से किए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है और आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने की अपील की है।

बताया जा रहा है कि जरांगे सुबह करीब 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अनशन की शुरुआत करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आगे मुंबई में आंदोलन किया जा सकता है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मराठा आंदोलन को संभालने की चुनौती बढ़ गई है।

पुलिस ने जरांगे को दिया नोटिस

अनशन शुरू होने से पहले शुक्रवार रात पुलिस ने मनोज जरांगे पाटिल को नोटिस सौंपा। इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन के दौरान तय नियमों का पालन करने की बात कही गई है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल शनिवार को जरांगे से मुलाकात कर सकते हैं।

जरांगे के मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन को लेकर भी विवाद सामने आया है। वकील गुणरत्न सदावर्ते ने आजाद मैदान पुलिस थाने में शिकायत देकर जरांगे के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

क्या हैं मनोज जरांगे की प्रमुख मांगें?

मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा समाज को कुनबी प्रमाणपत्र देने से जुड़ी कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं। उनकी प्रमुख मांगों में मराठवाड़ा में हैदराबाद गजट के आधार पर मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र और वैधता देने की मांग शामिल है।

इसके अलावा जरांगे की मांग है कि:

58 लाख कुनबी पंजीकरण प्रमाणपत्र और उनकी वैधता से जुड़ा मुद्दा हल किया जाए।
हैदराबाद गजट के आधार पर मराठवाड़ा के मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र और वैधता दी जाए।
सतारा और कोल्हापुर गजेटियर से संबंधित सरकार के फैसले को हटाया जाए।
आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को माफ किया जाए।
मराठा-कुनबी मामलों के लिए अलग कुनबी मंत्रालय बनाया जाए।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

जरांगे के दोबारा अनशन पर बैठने से महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। सरकार की ओर से बातचीत के जरिए आंदोलन को शांत करने की कोशिश की जा सकती है। इसी सिलसिले में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की जरांगे से संभावित मुलाकात को भी अहम माना जा रहा है।

फिलहाल जरांगे ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया जाएगा। ऐसे में शनिवार से शुरू होने वाली भूख हड़ताल पर सरकार, मराठा संगठनों और राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।