ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें! चुनाव चिह्न बदलते ही TMC के एक और उम्मीदवार ने मैदान छोड़ा, जानिए पूरा मामला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम उपचुनाव से पहले घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर ममता बनर्जी और दूसरे गुट के बीच विवाद चल रहा है, तो दूसरी तरफ नंदीग्राम में उम्मीदवारों को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
17 सितंबर को चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत TMC के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह दिया गया। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका में चुनाव आयोग के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को भी पक्षकार बनाया गया है।
नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार ने वापस लिया नाम
इसी बीच नंदीग्राम उपचुनाव में बड़ा राजनीतिक मोड़ आया। ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया।
लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
इस घटनाक्रम के बाद नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
नामांकन वापस लेने के बाद क्या होता है?
किसी उम्मीदवार का नामांकन वैध तरीके से वापस हो जाने के बाद वह उसी चुनाव में अपनी उम्मीदवारी दोबारा बहाल नहीं कर सकता। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी करता है और इसके बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
अगर नाम वापसी के बाद केवल एक वैध उम्मीदवार बचता है, तो चुनाव निर्विरोध होने की स्थिति बन सकती है। वहीं नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद नया नामांकन दाखिल करने का अवसर नहीं होता।
गिरफ्तारी के बाद क्या उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है?
किसी उम्मीदवार की केवल गिरफ्तारी से उसकी उम्मीदवारी अपने आप खत्म नहीं होती। उसकी चुनावी पात्रता संबंधित कानून और अदालत की कार्यवाही के आधार पर तय होती है। इसलिए जेल में होने की स्थिति में भी केवल गिरफ्तारी के आधार पर नामांकन स्वतः रद्द नहीं माना जाता।
नंदीग्राम इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण सीट रही है। 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ममता बनर्जी की राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा है।
2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
अब चुनाव से पहले एक तरफ TMC के नाम और चुनाव चिन्ह का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, दूसरी तरफ ममता गुट की उम्मीदवार के नाम वापस लेने और कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी से नंदीग्राम का चुनाव और ज्यादा चर्चा में आ गया है।