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क्या तिरंगा फहराना अपराध है या नियम तोड़ना? राहुल गांधी के 'कायरता' वाले बयान पर दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने दिए तीखे जवाब

 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस और CJP दोनों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बॉन्ड भरने के बावजूद CJP के नेताओं ने दोबारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।हर्ष मल्होत्रा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ऐसी पार्टी रही है, जिसने सबसे ज्यादा कानूनों का उल्लंघन किया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद और बढ़ने की संभावना है।

बॉन्ड भरने के बाद भी प्रदर्शन करने का आरोप

हर्ष मल्होत्रा के मुताबिक, CJP के नेताओं ने पहले शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरा था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने फिर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की। इसी आधार पर उन्होंने हिरासत की कार्रवाई को उचित ठहराया।दरअसल, दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के नेताओं ने जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश किया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बैरिकेड पार किए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए। अधिकारियों ने यह भी कहा कि नेताओं ने पहले दिए गए शांति संबंधी आश्वासन का उल्लंघन किया।

सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत

14 अक्टूबर 2026 को सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है। उनके खिलाफ कथित रूप से अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, शांति बनाए रखने के बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोपों के तहत कार्रवाई की गई है।CJP के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।हालांकि, यह मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक स्थानों पर विरोध करने की अनुमति को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों कर रही है CJP?

CJP और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने से जुड़े बदलावों के बाद इस मुद्दे पर विवाद और गहरा गया है। CJP का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी।

कांग्रेस और बीजेपी के बीच भी बढ़ा राजनीतिक टकराव

CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। हर्ष मल्होत्रा ने जहां कांग्रेस पर कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, वहीं CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे असहमति की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।

इस पूरे विवाद में एक तरफ पुलिस कानून-व्यवस्था और पहले दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी अपने विरोध के अधिकार की बात उठा रहे हैं।अब सवाल यह है कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को लेकर यह विवाद आगे क्या मोड़ लेगा और क्या CJP अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी? फिलहाल, सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत तथा हर्ष मल्होत्रा के बयान ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।